Israel Iran War: एक तरफ जहां पूरा देश 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक में डूबा है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों का सख्त पहरा है, वहीं दूसरी तरफ 1979 की इस्लामी क्रांति के आदर्शों पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जिस ईरान ने कभी ‘वंशवाद’ (राजशाही) को उखाड़ फेंका था, आज उसी की कमान एक पिता से बेटे के हाथों में सौंप दी गई है. आखिर बिना किसी बड़े सरकारी पद पर रहे, मोजतबा खामेनेई इतने ताकतवर कैसे बन गए? आइए ईरान के नए ‘बॉस’ की पूरी कहानी डिकोड करते हैं.
तेहरान के आसमान में छाई बारूद की धुंध के बीच ईरान ने अपने आगे के रास्ते को साफ कर दिया है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान ने रातों-रात अपना नया ‘सुप्रीम लीडर’ चुन लिया है. आइये जानें क्या है 1979 का मामला?
क्या यह 1979 की क्रांति से गद्दारी है?
मोजतबा के सर्वोच्च नेता बनने से ईरान के भीतर ही एक नई राजनीतिक बहस और अंदरूनी कलह शुरू हो गई है. 1979 की इस्लामी क्रांति का मूल आधार ही शाह (राजा) के वंशानुगत शासन को खत्म करना था. अब अली खामेनेई की मौत के बाद सीधे उनके बेटे को सत्ता सौंपे जाने से आलोचक इसे ‘नए रूप का राजतंत्र’ बता रहे हैं. हालांकि, सेना की मजबूत पकड़ के कारण फिलहाल विरोध की आवाजें दबा दी गई हैं.
पर्दे के पीछे का सुप्रीम बॉस
मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे हैं और उनके सबसे बड़े ‘शैडो ऑपरेटर’ भी. उनका जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था और वे एक कट्टर धार्मिक माहौल में पले-बढ़े. उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) में काम किया था, जिससे उनकी सेना में जड़ें मजबूत हुईं.
ये भी पढ़ें: इजरायल-ईरान जंग के बीच समझें कश्मीरी छात्रों के ‘तेहरान मोह’ का कारण? जानिए 5 बड़ी वजहें
ईरान की सत्ता में उनकी ताकत
मोजतबा खामेनेई का नाम कागजों पर कम नजर आता है, लेकिन ईरान की सत्ता में उनकी तूती बोलती है. वे अपने पिता के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और गेटकीपर रहे हैं. IRGC और बासिज मिलिशिया के साथ उनके गहरे संबंध हैं, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है. 2009 में ईरान में राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में उनकी भूमिका ने उन्हें ईरान के कट्टरपंथियों का चहेता बना दिया.
और भी आक्रामक होगा ईरान
मोजतबा खामेनेई ऐसे समय में ईरान के तख्त पर बैठे हैं, जब देश इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है. एक तरफ इजरायल और अमेरिका के साथ सीधी सैन्य जंग छिड़ी है, तो दूसरी तरफ प्रतिबंधों से टूट चुकी अर्थव्यवस्था और जनता का दबा हुआ गुस्सा सुलग रहा है. मोजतबा की पहचान एक ऐसे नेता की है जो कूटनीति से ज्यादा ‘बल प्रयोग’ में विश्वास रखता है. उनके हाथ में सत्ता का आना यह साफ संकेत है कि ईरान अब नरमी नहीं, बल्कि और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएगा.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





