Madhavrao Scindia Notice: मध्यप्रदेश की सियासत के केंद्र ‘जयविलास पैलेस’ और ग्वालियर नगर निगम के बीच टैक्स को लेकर एक नई रार छिड़ गई है. नगर निगम द्वारा जारी शहर के 50 सबसे बड़े संपत्ति कर (Property Tax) बकायादारों की सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया का नाम शामिल होने से हड़कंप मच गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह सूची ठीक 10 मार्च को सार्वजनिक हुई, जो माधवराव सिंधिया की जयंती का दिन है.
कटोराताल की बेशकीमती जमीन पर बकाया (Madhavrao Scindia Property Tax)
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, स्व. माधवराव सिंधिया (Late Madhavrao Scindia)के नाम पर दर्ज संपत्ति (आईडी: 1002732779) पर 33,32,719 रुपये का टैक्स बकाया है. यह संपत्ति शहर के हृदय स्थल कटोराताल के सामने स्थित एक खाली भूमि बताई जा रही है. वार्ड क्रमांक 57 में दर्ज इस जमीन को लेकर निगम अब दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है. निगम आयुक्त संघ प्रिय के अनुसार, संबंधित पक्ष को सूचना दे दी गई है और यदि यह संपत्ति किसी ट्रस्ट से जुड़ी है, तो रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा.
जयंती पर सूची वायरल होने से सियासी घमासान
जैसे ही यह सूची विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप से लीक हुई, ग्वालियर की राजनीति गरमा गई. एक तरफ जहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक इस टाइमिंग को लेकर नाराज हैं, वहीं कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस पार्षदों ने सवाल उठाया है कि जब आम जनता से निगम सख्ती से वसूली करता है, तो शाही परिवार की संपत्तियों पर सालों से कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हालांकि, विवाद बढ़ता देख निगम ने अपने ग्रुप से सूची हटा ली, लेकिन तब तक यह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी.
निगम की खस्ता माली हालत और बड़े बकायेदार
ग्वालियर नगर निगम इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है. वेंडरों के भुगतान और कर्मचारियों के वेतन में आ रही दिक्कतों के कारण राजस्व वसूली पर जोर दिया जा रहा है. निगम की इस लिस्ट में केवल सिंधिया परिवार ही नहीं, बल्कि कई बड़े सरकारी संस्थान भी शामिल हैं:
- कैंसर हॉस्पिटल: 51.94 करोड़ रुपये
- एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी: 2.93 करोड़ रुपये
- पीडब्ल्यूडी कलेक्टर बंगला: 46.83 लाख रुपये
- श्रीमंत माधवराव सिंधिया: 33.32 लाख रुपये
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स्व. माधवराव सिंधिया के निधन को लगभग 25 वर्ष बीत चुके हैं, ऐसे में उनके नाम पर टैक्स बकाया होना निगम की पुरानी लचर कार्यप्रणाली को भी दर्शाता है. अब जबकि महल के कामकाज देखने वाले प्रतिनिधियों ने गेंद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पाले में डाल दी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजघराना इस बकाये का निपटारा करता है या तकनीकी दस्तावेजों के जरिए इसे चुनौती दी जाती है. बहरहाल, जयंती के दिन आए इस नोटिस ने ‘महाराज’ के समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छेड़ दी है.
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