प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक ऐसा ‘सुभाषितम्’ साझा किया है. यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब दुनिया वैचारिक मतभेदों और युद्ध की आग में झुलस रही है, पीएम ने ऋग्वेद के एक प्राचीन मंत्र के जरिए भारत की ‘ओपन माइंडेड’ कूटनीति और संस्कृति का परिचय दिया है. इस ट्वीट के जरिए उन्होंने संदेश दिया है कि प्रगति के लिए दिल और दिमाग के दरवाजे हर तरफ से आने वाले अच्छे विचारों के लिए खुले होने चाहिए.
क्या है वह मंत्र और उसका भाव?
पीएम मोदी ने ऋग्वेद का जो मंत्र साझा किया है, वह कुछ इस प्रकार है:
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः.
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥ pic.twitter.com/o0CLGr32qi
— Narendra Modi (@narendramodi) March 13, 2026
आसान भाषा में इसका मतलब समझें तो इसका अर्थ है कि “हमारे पास चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी और श्रेष्ठ विचार आएं, जिन्हें कोई दबा न सके, जो हमें प्रगति की ओर ले जाएं और सत्य को प्रकट करें. ईश्वर और दैवीय शक्तियां हमारी उन्नति के लिए हमेशा तत्पर रहें और हर दिन हमारी रक्षा करें.”
‘सुभाषितम्’ के पीछे का गहरा संदेश
जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी ने इस मंत्र के जरिए सिर्फ आध्यात्मिक बात नहीं की है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक मायने भी हैं:
ज्ञान का स्वागत: यह मंत्र बताता है कि ज्ञान किसी एक देश या धर्म की बपौती नहीं है. हमें दुनिया में कहीं भी कुछ अच्छा दिखे, उसे अपनाना चाहिए.
सबका साथ, सबका विकास: मंत्र में ‘वृधे’ (प्रगति) की बात कही गई है, जो सीधे तौर पर समावेशी विकास के लक्ष्य को दर्शाती है.
सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर: जी-20 से लेकर अब तक, पीएम मोदी लगातार वेदों के जरिए भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को ग्लोबल स्टेज पर रख रहे हैं. यह ट्वीट भी उसी कड़ी का हिस्सा है.
सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?
पीएम मोदी का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब देश में विकास के नए आयाम गढ़े जा रहे हैं. लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री इस सुभाषितम् के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रगति के लिए न केवल आधुनिक तकनीक, बल्कि महान प्राचीन संस्कार और खुले मन से सोचना भी जरूरी है. वहीं नेटीजेंस इस पोस्ट को बड़े पैमाने पर शेयर कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि यह मंत्र हमें नकारात्मकता से दूर रहकर सकारात्मकता और ज्ञान की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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