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POCSO कोर्ट में क्यों नहीं हुई स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले की सुनवाई? जानें अगली तारीख और कोर्ट का अपडेट

यह मामला प्रयागराज की पॉक्सो अदालत में चल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े यौन शोषण आरोपों से जुड़ा है. आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिस पर अदालत ने 21 फरवरी को झूंसी पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया.

प्रयागराज की पॉक्सो अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े मामले की सुनवाई बुधवार (11 मार्च) को नहीं हो पाई. अदालत में सुनवाई दोपहर 2 बजे स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में तय थी, लेकिन स्वामी की अलविदा नमाज में शामिल होने की वजह से उन्हें उपस्थित नहीं होना पड़ा. इसके चलते अगली सुनवाई अब 17 अप्रैल को होगी.

क्या है पूरा मामला?

कहानी की शुरुआत आशुतोष ब्रह्मचारी के उन गंभीर आरोपों से हुई थी, जिसमें उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दो नाबालिग बटुकों (शिष्यों) के यौन शोषण का आरोप लगाया था. इसी साल 21 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. अब शंकराचार्य पक्ष की ओर से इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है.

कोर्ट में क्या हुआ?

शुक्रवार दोपहर 2:00 बजे स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में इस अर्जी पर बहस होनी थी. हालांकि, सुनवाई टलने के बाद अब 17 अप्रैल को वादी स्वामी मुकुंदानंद गिरी के बयान दर्ज किए जाएंगे. कोर्ट परिसर में उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील डॉ. पी.एन. मिश्रा और श्रीनाथ त्रिपाठी समेत पूरी लीगल टीम मौजूद रही.

स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने मीडिया से बातचीत में आशुतोष ब्रह्मचारी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि यह सब गुरु जी की छवि खराब करने के लिए रचा गया एक झूठ है. उनके मुख्य तर्क कुछ इस प्रकार रहे:

  • विदेश भागने का दावा गलत: उन्होंने कहा कि दंडी संन्यासी परंपरा में विदेश यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पासपोर्ट बना है और न ही उनका अपना. ऐसे में विदेश भागने की बातें बेबुनियाद हैं.
  • फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट: डॉ. स्वाति अघोरी के जिस फेसबुक अकाउंट का जिक्र हो रहा है, उसे भी उन्होंने फर्जी करार दिया.
  • हमले की कहानी झूठी: ट्रेन में हमले की जो बात कही गई थी, उसे भी उन्होंने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया.

‘गौ-रक्षा अभियान नहीं रुकेगा’

स्वामी मुकुंदानंद ने स्पष्ट किया कि इन कानूनी अड़चनों के बावजूद गौ-हत्या बंद कराने का उनका अभियान जारी रहेगा. उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ से इस मुहिम का शंखनाद किया है और वे इसे पीछे नहीं हटाएंगे. फिलहाल, सबकी नजरें अब 17 अप्रैल पर टिकी हैं, जब अदालत में गवाहियां और दलीलें शुरू होंगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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