हुति विद्रोहियों का क्या है गेम प्लान? (AI IMAGE)
Houthi Rebels Explained: मिडिल ईस्ट में चल रही भीषण जंग का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है. पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में आग लगी हुई है. अमेरिका-इजरायल लगातार ईरान पर बमबारी और हमले कर रहे हैं. ईरान भी इजरायल और मिडिल ईस्ट के देशों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. इसी बीच हूती विद्रोहियों ने जंग में धमाकेदार एंट्री ली है. उन्होंने इजरायल के कुछ शहरों में बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किये हैं. यमन के हूती विद्रोहियों के इस जंग में शामिल होने के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. आखिर हूती विद्रोही कौन हैं और अगर वो जंग में शामिल होते हैं तो यह कैसे दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा? आइये बताते हैं.
हूती विद्रोहियों के बारे में बताएं उससे पहले समझ लेते हैं कि आखिर वो कौन हैं और दुनिया के किस हिस्से में उनका नियंत्रण है?
हूती को अंसार अल्लाह भी कहा जाता है, यह यमन का एक बेहद ही ताकतवर सशस्त्र और राजनीतिक गुट है. इस गुट को मुख्य रूप से शिया समुदाय का गुट माना जाता है. साल 1990 के दशक में इनका उभार हुआ था. शुरुआत में यह गुट एक धार्मिक आंदोलन था, लेकिन समय के साथ इसने हथियारों के दम पर यमन के एक महत्वपूर्ण इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया. तब से लेकर अबतक इनका यमन के बड़े इलाके पर प्रभाव है.

माना जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान से सैन्य और राजनीतिक मदद मिलती है. हालांकि हूती पूरी तरह ईरान के कंट्रोल में नहीं हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ईरान के पक्ष में हूती विद्रोही आ सकते हैं.
लाल सागर में कितना अहम हैं हूती?
यमन के दक्षिणी पश्चिमी छोर पर मौजूद बाब-अल-मंदेब (आंसुओं का द्वार) लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है, जो आगे जाकर हिंद महासागर में मिलता है. यह दुनिया के सबसे बड़े समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है. इस रास्ते से दुनिया भर में तेल और माल का व्यापार होता है.
हूती विद्रोहियों का इसी दक्षिणी पश्चिमी छोर के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है. जहां से बाब-अल-मंदेब गुजरता है. ऐसे में अगर हूती विद्रोही ईरान के समर्थन में पूरी तरह से आ जाते हैं तो वो होर्मूज स्ट्रेट की तरह इस रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले कर इसे हमेशा के लिए बंद कर सकते हैं. इससे वैश्विक व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ जाएगा.
हालांकि हूती विद्रोही पूरी तरह से बाब-अल-मंदेब को बंद कर दें यह इतना भी आसान नहीं है. यहां पर दुनिया की कई ताकतवर नौसेनाएं पड़ाव डाले रहती हैं, ताकि व्यापार बाधित ना हो पाए. हूती विद्रोही इसे पूरी तरह बंद नहीं कर सकते, लेकिन हमले कर कुछ व्यापारिक जहाजों को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं.
दोहा इंस्टिट्यूट फॉर ग्रैजुएट स्टडीज में मीडिया स्टडीज के प्रोफेसर मोहम्मद अल्मासरी ने अल जजीरा से बात करते हुए कहा बताया,
हमने पिछले कुछ सालों में देखा है कि हूती विद्रोही काफी ताकतवर हैं. अगर वो बाब-अल-मंदब को बंद कर देंगे तो लाल सागर में मौजूद स्वेज नहर चोक हो जाएगी. जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट के दो सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग (होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब) दोनों बंद हो जाएंगे. जिससे वैश्विक व्यापार को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा.
ये भी पढ़ें- पेट्रोल पंप से एक दिन में कितना तेल खरीद सकते हैं आप? इसे घर में स्टोर करना क्यों मना? जान लें सरकार के नियम
क्यों महत्वपूर्ण है बाब-अल-मंदेब?
बाब-अल-मंदेब की गिनती दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक मार्ग के रूप में होती है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी सहित हिंद महासागर को जोड़ता है. मिडिल ईस्ट, भारत, और पूर्वी एशियाई देशों के व्यापारिक जहाजों को यूरोप पहुंचने के लिए इसी मार्ग से होते हुए स्वेज नहर तक जाना पड़ता है. यहां से दुनिया का कुल 10-15 प्रतिशत व्यापार होता है. होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही ईरान ने बंद कर रखा है. ऐसे में अगर हूती विद्रोही इसे भी चोक कर देते हैं तो दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट में फंस सकती है. बाब-अल-मंदेब यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला सबसे अहम व्यापारिक रास्ता है. जहां से बड़ी मात्रा में तेल, गैस और अन्य सामान यूरोप पहुंचते हैं और वहां से एशिया और अरब क्षेत्र में आते हैं. अगर यह बाधित होता है तो जहाजों को अफ्रीका के नीचे मौजूद केप ऑफ गुड होप रास्ते से गुजरना होगा, जो बहुत ही खर्चीला और समय लेने वाला रास्ता है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




