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सियासत की नई धुरी: 2024 के बाद कैसे महिला मतदाता बनीं ‘किंगमेकर’, हर चुनाव में दिख रहा असर

Election Analysis: 2024 के बाद भारतीय राजनीति में महिलाएं ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. कल्याणकारी योजनाओं और नकद हस्तांतरण ने महिला वोट प्रतिशत को पुरुषों से आगे पहुँचा दिया है.

Women Voters India
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 2024 एक बड़े बदलाव का गवाह बना. पहले कहा जाता था कि चुनाव जाति और धर्म के समीकरणों पर लड़े जाते हैं, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. आज के दौर में महिलाएं भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत और निर्णायक आवाज बनकर उभरी हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब 2026 के विधानसभा चुनावों तक एक ऐसा ट्रेंड बन गया है, जिसने बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. अब राजनीतिक दल समझ चुके हैं कि सत्ता की चाबी ‘आधी आबादी’ के हाथ में ही है.

2024 का ऐतिहासिक टर्नआउट: पुरुषों को पछाड़ा

साल 2024 के आम चुनावों ने एक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. पहली बार ऐसा हुआ जब महिला मतदाताओं का वोटिंग प्रतिशत (65.78%) पुरुष मतदाताओं (65.55%) से ज्यादा रहा. इस चुनाव में करीब 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने वोट की ताकत दिखाई. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि भारतीय महिलाएं अब राजनीतिक रूप से जागरूक हो चुकी हैं और वे अपने भविष्य का फैसला खुद करना चाहती हैं.

विधानसभा चुनावों में भी जारी रहा ‘महिला शक्ति’ का जादू

लोकसभा के बाद झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में भी यही लहर देखी गई. झारखंड चुनाव के पहले चरण में ही 69.04% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 64.27% तक ही सीमित रहा. खास बात यह है कि 43 में से 37 सीटों पर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं ज्यादा थी. इसी तरह 2025 के बिहार चुनाव में भी महिलाओं ने 71.6% मतदान कर पुरुषों (62.8%) को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया. आज 9 अप्रैल 2026 को हो रहे असम, केरल और पुडुचेरी के चुनावों में भी पोलिंग बूथों पर महिलाओं की लंबी कतारें इस ‘साइलेंट क्रांति’ की गवाह बन रही हैं.

सीधा नकद हस्तांतरण (DBT) बना सबसे बड़ा हथियार

राजनीतिक विशेषज्ञों और एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के इस बढ़ते रुझान के पीछे सरकारी कल्याणकारी योजनाएं सबसे बड़ी वजह हैं. महाराष्ट्र की ‘माझी लड़की बहिण योजना’ और झारखंड की ‘मंईयां सम्मान योजना’ ने महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे पहुँचाए हैं. जब पैसा सीधे महिला के हाथ में आता है, तो वह न केवल आत्मनिर्भर महसूस करती है, बल्कि उस सरकार के प्रति उसका भरोसा भी बढ़ता है. यह सीधे तौर पर मतदान के प्रतिशत में तब्दील हो रहा है.

बुनियादी सुविधाओं से सुधरा जीवन स्तर

केवल नकद पैसा ही नहीं, बल्कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने वाली योजनाओं ने भी महिलाओं के मन को जीता है. स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर में शौचालय का निर्माण, ‘हर घर जल’ योजना से नल में पानी और मुफ्त गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं ने महिलाओं के कठिन परिश्रम को कम किया है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर का मालिकाना हक महिलाओं के नाम पर होने से उनके भीतर सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की भावना पैदा हुई है. यही कारण है कि वे अब मतदान के दिन सबसे पहले घर से बाहर निकलती हैं.

आर्थिक आजादी और स्वरोजगार का असर

स्वयं सहायता समूहों (SHG) की मजबूती और मुद्रा योजना ने लाखों महिलाओं को अपना छोटा कारोबार शुरू करने में मदद की है. बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ ने तो कमाल ही कर दिया, जहाँ बेहतर काम करने पर 2 लाख रुपये तक की मदद दी जा रही है. जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तो वे परिवार के पुरुष सदस्यों के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी सोच और सुरक्षा को ध्यान में रखकर वोट देती हैं. वे अब अपनी रसोई के बजट और अपने बच्चों के भविष्य को देखकर उम्मीदवार चुनती हैं.

बदल गई चुनावी रणनीति: अब एजेंडे में महिलाएँ पहले

2024 से पहले राजनीतिक दल युवाओं और किसानों को केंद्र में रखकर अपना मेनिफेस्टो (घोषणापत्र) तैयार करते थे. लेकिन अब हर दल का मुख्य फोकस महिलाओं पर है. अब चुनाव जाति या धर्म के पुराने नारों पर नहीं, बल्कि ‘जेंडर पॉलिटिक्स’ यानी महिला हितों पर लड़े जा रहे हैं. महिला आरक्षण बिल, जो संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण की बात करता है, इसी बदली हुई सियासत का नतीजा है. अब पार्टियां जानती हैं कि अगर महिलाओं का दिल जीत लिया, तो चुनाव जीतना आसान हो जाएगा.

निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि भारतीय लोकतंत्र अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है. महिलाएं अब सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ नहीं हैं, बल्कि वे असली ‘किंगमेकर’ हैं. उनकी बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में देश की नीतियां और राजनीति पूरी तरह से महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द ही घूमेंगी. आज की महिला जागरूक है, सशक्त है और उसे पता है कि उसका एक वोट देश की दिशा बदल सकता है.



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