पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अब अपने चरम पर पहुंच चुका है. सत्ताधारी टीएमसी को उसी के गढ़ में मात देने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सबसे बड़े रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को मोर्चे पर उतार दिया है. शाह आज (मंगलवार) राज्य के चार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में धुआंधार जनसभाओं को संबोधित करेंगे. इन 4 मेगा रैलियों के जरिए बीजेपी की कोशिश सीधे तौर पर मतदाताओं तक अपनी पहुंच और पैठ को मजबूत करने की है.
अमित शाह का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम (Rally Schedule)
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आज का दिन बेहद व्यस्त और रणनीतिक रूप से अहम रहने वाला है. उनकी सभाओं का विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है.
पहली जनसभा (सुबह 10:30 बजे): शाह अपने तूफानी दौरे की शुरुआत उत्तरी बंगाल से करेंगे. उनकी पहली रैली दार्जिलिंग-कुर्सियांग विधानसभा के सुकना हाई स्कूल मैदान (सिलीगुड़ी) में होगी.
दूसरी जनसभा (दोपहर 12:45 बजे): पहाड़ियों के बाद शाह का काफिला पश्चिम बर्धमान की ओर रुख करेगा. यहां वह कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के गणेश पूजा मैदान (बाल्टोरिया) में मतदाताओं को संबोधित करेंगे.
तीसरी जनसभा (दोपहर 02:15 बजे): इसके बाद शाह मेदिनीपुर के रण में उतरेंगे. उनकी तीसरी सभा पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी विधानसभा क्षेत्र में स्थित बिल्ला स्टेडियम मठ (सी. के. रोड) में आयोजित की जाएगी.
चौथी जनसभा (दोपहर 03:45 बजे): दिन की आखिरी और चौथी रैली पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर विधानसभा क्षेत्र में होगी, जहां वह बिनॉय स्मृति फुटबॉल मैदान में बीजेपी कार्यकर्ताओं और जनता में जोश भरेंगे.
सीधा संवाद और शक्ति प्रदर्शन
उत्तर में दार्जिलिंग से लेकर दक्षिण में पूर्व मेदिनीपुर तक, एक ही दिन में चार अलग-अलग दिशाओं में रैलियां करना बीजेपी की एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है. इन जनसभाओं के जरिए भाजपा न केवल अपना ‘शक्ति प्रदर्शन’ कर रही है, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को सीधे जनता के बीच ले जाकर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही है.
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पश्चिम बंगाल का यह विधानसभा चुनाव (2026) बीजेपी और टीएमसी, दोनों के लिए साख का सवाल बना हुआ है. अमित शाह की ये चार रैलियां न केवल उन विशिष्ट विधानसभा क्षेत्रों के समीकरणों को प्रभावित करेंगी, बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक विमर्श में एक नया नैरेटिव सेट करने का काम भी करेंगी. अब देखना यह है कि शाह के इस चौतरफा प्रहार का तृणमूल कांग्रेस (TMC) किस तरह से जवाब देती है.
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