West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का आगाज़ होते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. मुर्शिदाबाद से लेकर सिलीगुड़ी तक, चुनावी मैदान जंग के मैदान में तब्दील होता दिख रहा है. सबसे ज्यादा तनाव मुर्शिदाबाद के नौदा और कांदी इलाकों में देखने को मिला, जहां आम जनता उन्नयन पार्टी (AUJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए.
हुमायूं कबीर का धरना
मुर्शिदाबाद की राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले AUJP के संस्थापक हुमायूं कबीर इस समय नौदा में धरने पर बैठ गए हैं. उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष काम नहीं कर रहा है. कबीर ने दावा किया कि बीती रात एक पुलिस अधिकारी ने उनके समर्थकों पर बेवजह लाठीचार्ज किया. उनकी मांग साफ है जब तक उस अधिकारी को हटाकर नया अफसर तैनात नहीं किया जाता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.
हुमायूं कबीर ने चुनाव आयोग से भी अपील की है कि उनके समर्थकों को धमकाने वाले टीएमसी कार्यकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा, “मेरे लोगों को पीटा जा रहा है, डराया जा रहा है, क्या यही लोकतंत्र है?”
बमबाजी और पत्थरबाजी से दहला इलाका
विवाद की शुरुआत बुधवार रात को हुई जब नौदा इलाके में क्रूड बम फेंके गए. इस घटना में एक महिला घायल हो गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी दहशत है. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात के अंधेरे में अचानक हुए इस हमले से हर कोई सहम गया था.
गुरुवार को जब मतदान शुरू हुआ, तो स्थिति और बिगड़ गई. समर्थक हाथों में लाठियां लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े, पत्थरबाजी हुई और सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया. भीड़ को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा और हल्का लाठीचार्ज कर दंगाइयों को खदेड़ना पड़ा.
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चुनाव आयोग सख्त, मांगी गई रिपोर्ट
राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आ रही हिंसा की खबरों ने चुनाव आयोग (EC) की चिंता बढ़ा दी है. सिलीगुड़ी के जगदीश चंद्र विद्यालय बूथ के बाहर भी बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की खबरें आई हैं.
नौदा की घटना को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने मुर्शिदाबाद के डीएम और डीईओ से तत्काल रिपोर्ट तलब की है. आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हिंसा के पीछे कौन था और क्या वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे?
बंगाल में साख की लड़ाई
इस बार पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है. एक तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी पिछली बार की 77 सीटों की बढ़त को जीत में बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. पहले चरण की 152 सीटों पर हो रही यह वोटिंग राज्य का मूड तय करेगी, लेकिन जिस तरह की हिंसा की खबरें आ रही हैं, उसने प्रशासन की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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