Ravan funeral Ram dharm message: वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि जब रावण का वध हुआ तो पूरी लंका शोक और अंधकार में डूब गई. रावण ने अधर्म का मार्ग चुना था, लेकिन वह एक महान विद्वान और शिव भक्त भी था. उसकी मृत्यु के बाद यह सवाल उठा कि उसका अंतिम संस्कार कैसे होगा.
विभीषण का इनकार
रावण के भाई विभीषण ने शुरुआत में अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया. उनका कहना था कि रावण ने सीता का अपहरण किया और अधर्म का रास्ता अपनाया, इसलिए वह ऐसे व्यक्ति के लिए संस्कार नहीं कर सकते.
राम का धर्मोपदेश
तब भगवान राम ने विभीषण को समझाया कि मृत्यु के साथ ही शत्रुता समाप्त हो जाती है. उन्होंने कहा कि रावण एक महान योद्धा और वेदों का ज्ञाता था, इसलिए उसका अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक होना चाहिए. राम ने यह भी कहा कि रावण तुम्हारा भाई है, जैसे मेरा. इस उपदेश को सुनकर विभीषण ने सहमति जताई.
शाही रीति-रिवाजों से संस्कार
रावण का अंतिम संस्कार लंका की परंपराओं के अनुसार बड़े धूमधाम से किया गया. चंदन, मसालों और फूलों से सजी विशेष चिता तैयार की गई. वैदिक मंत्रों के बीच विभीषण ने शास्त्रों के अनुसार संस्कार पूरे किए. मंदोदरी और लंका की स्त्रियां भी मौजूद थीं और उन्होंने रावण को विदाई दी. राम और उनकी वानर सेना भी इस समारोह में शामिल हुई और रावण के प्रति सम्मान व्यक्त किया.
मृत्यु के समय राम नाम
कहा जाता है कि रावण ने अंतिम सांस लेने से पहले तीन बार राम नाम का उच्चारण किया. विद्वानों का मानना है कि यह उसके पापों का प्रायश्चित था और इसी कारण उसे मोक्ष प्राप्त हुआ. शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान का नाम लेने से आत्मा को मुक्ति मिलती है.
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राम का संदेश
रावण के अंतिम संस्कार का दृश्य यह दिखाता है कि भगवान राम व्यक्ति की गलतियों से घृणा करते थे, व्यक्ति से नहीं. उन्होंने संसार को यह संदेश दिया कि मृत्यु शत्रुता का अंत करती है और हर योद्धा को सम्मान मिलना चाहिए. यह घटना धर्म और मानवता का अद्भुत उदाहरण है.
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-भारत एक्सप्रेस
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