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उपहार अग्निकांड के दोषी पर नया शिकंजा: पासपोर्ट के लिए जानकारी छिपाने का आरोप, कोर्ट ने 3 अगस्त को किया तलब

उपहार अग्निकांड मामले में एक बार फिर सुशील अंसल की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पटियाला हाउस कोर्ट ने पासपोर्ट मामले में उन्हें 3 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है.

Passport Fraud Case India
Edited by Shubhra Rai

उपहार अग्निकांड से जुड़े पासपोर्ट धोखाधड़ी मामले में सुशील अंसल पर कानूनी कार्रवाई जारी है. कोर्ट ने 3 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है और मामले में जांच आगे बढ़ रही है.

3 अगस्त को पेश होने का आदेश

पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में दोषी सुशील अंसल को पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आपराधिक मामलों को छिपाने और झूठे घोषणपत्र दाखिल करने के मामले में पुनीत नावेद मुस्तजबा को समन जारी कर 3 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है. वही कोर्ट के समन के बावजूद पासपोर्ट अधिकारी सतीश कुमार और भवना कोर्ट में पेश हो पाए.

आरोपों से इनकार कर दिया

मामले में इनलोगों को बयान दर्ज होना है. पिछली सुनवाई के दौरान सुशील अंसल ने कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पहली नजर में सुशील अंसल ने अपने ऊपर लगे आरोपों से संबंधित जानकारी को छुपाया है. यह मामला सुशील अंसल के खिलाफ अलग से चल रहा है, जो उपहार अग्निकांड मामले में उनकी सजा के बाद सामने आया है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपित सुशील अंसल ने गलत या कम जानकारी के आधार पर प्राधिकारियों को एक खास तरीके से काम करने के लिए उकसाया और इसके जरिये तरीके से पासपोर्ट रिन्यूवल कराकर गलत फायदा उठाया.

आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए

अदालत ने कहा था कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत दंडनीय अपराध है. मामला 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश से शुरू हुआ था. उसमें उपहार कांड पीड़ितों के संगठन एवीयूटी की याचिका पर अंसल द्वारा वर्षो तक गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए थे.

अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया

अंसल के खिलाफ 2019 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया था और उसपर झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया गया था, क्योंकि उसने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनी दोषसिद्धि की घोषणा नहीं की थी. बता दें कि वर्ष 1997 में दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हो गई थी. सालों तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधुओं जिम्मेदार ठहराया गया.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को 60 करोड़ रुपए दिल्ली सरकार के पास जमा कराने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने इस रकम से द्वारका में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराने का आदेश दिया था, लेकिन द्वारका में इस रकम का इस्तेमाल नहीं किया गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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