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पोखरण की 28वीं वर्षगांठ: पीएम मोदी बोले- ‘1998 में दुनिया ने देखी थी भारत की अटल इच्छाशक्ति’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ पर देश के अटल साहस और वैज्ञानिकों की प्रतिबद्धता को याद किया. उन्होंने शिव-शक्ति के श्लोक के माध्यम से भारत की आत्मनिर्भरता और सामरिक ताकत का संदेश दिया.

Pokhran-II 28th Anniversary PM Modi Remembers 1998 Nuclear Tests & India's Unshakable Will

AI IMAGE

आज का दिन यानी 13 मई, भारत के इतिहास के उन पन्नों में दर्ज है जो हमें गर्व से भर देते हैं. आज से ठीक 28 साल पहले राजस्थान के तपते रेगिस्तान पोखरण में जो धमाका हुआ था, उसकी गूंज ने पूरी दुनिया को बता दिया था कि भारत अब किसी के आगे झुकने वाला नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक मौके पर देशवासियों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही भावुक संदेश दिया है.

1998 के परमाणु परीक्षणों को किया याद

प्रधानमंत्री ने 1998 के उन परमाणु परीक्षणों को याद करते हुए कहा कि 11 मई के उन टेस्ट्स के बाद पूरी दुनिया का दबाव हमारे देश पर था, लेकिन भारत की इच्छाशक्ति इतनी अटल थी कि कोई भी ताकत हमें डिगा नहीं सकी.

पीएम मोदी ने अपने संदेश में केवल राजनीति की बात नहीं की, बल्कि भारत के आध्यात्मिक दर्शन को भी इससे जोड़ा. उन्होंने एक विशेष श्लोक उद्धृत किया:

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।
न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः ।।

इस श्लोक के जरिए पीएम मोदी ने शिव और शक्ति के उस अटूट रिश्ते की बात की जो कभी अलग नहीं हो सकते. इसके माध्यम से उन्होंने भारत की सामरिक स्वायत्तता और ‘आत्मनिर्भर’ होने के संकल्प पर जोर दिया. उनका कहना था कि जैसे शिव के बिना शक्ति नहीं और शक्ति के बिना शिव नहीं, वैसे ही बिना सामर्थ्य के स्वाभिमान की रक्षा मुमकिन नहीं है.

क्या हुआ था उन दिनों में?

आज की पीढ़ी के लिए ये जानना जरूरी है कि 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में भारत ने कुल पांच सफल परमाणु परीक्षण किए थे, जिसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया था. उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया भर के प्रतिबंधों और दबाव को दरकिनार करते हुए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा. इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया जो परमाणु शक्ति संपन्न हैं.

वैज्ञानिकों को सलाम

प्रधानमंत्री ने इन परीक्षणों के पीछे दिन-रात एक करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और रक्षा विशेषज्ञों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि ये लोग हमारे देश के गौरव और स्वाभिमान के सच्चे शिल्पी हैं. आज भारत जो आत्मनिर्भरता की बात करता है, उसकी नींव इन्हीं वैज्ञानिकों ने सालों पहले रख दी थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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