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पेट्रोल-सीएनजी के दाम बढ़े, लेकिन भारत का निर्यात भी 13% बढ़कर 80 अरब डॉलर के पार जा पहुंचा

भारत का निर्यात अप्रैल में सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत बढ़कर 80.8 अरब डॉलर हो गया है, इसमें गुड्स की हिस्सेदारी 43.56 अरब डॉलर और सर्विसेज की हिस्सेदारी 37.2 अरब डॉलर रही है.

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अप्रैल का महीना देश की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ खास रहा है. एक तरफ जहां पेट्रोल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा रही, वहीं दूसरी तरफ देश के निर्यात ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का कुल निर्यात 13.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80.8 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है. यह दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय कारोबार लगातार मजबूती पकड़ रहा है.

अगर आंकड़ों को देखें तो इस बढ़ोतरी में सामान (गुड्स) और सेवाओं (सर्विसेज) दोनों का बड़ा योगदान रहा है. अप्रैल में गुड्स एक्सपोर्ट 43.56 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि सेवाओं का निर्यात 37.2 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़े क्रमशः 38.28 अरब डॉलर और 32.8 अरब डॉलर थे. यानी दोनों ही क्षेत्रों में साफ तौर पर बढ़त देखने को मिली है.

वैश्विक तनाव के बीच भी बेहतर प्रदर्शन

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं. खासकर अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग को लेकर अनिश्चितता ने कई देशों के व्यापार पर असर डाला है. इसके बावजूद भारत का निर्यात बढ़ना यह दिखाता है कि देश ने अपने व्यापारिक संबंधों को सिर्फ कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा है.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ समय में नए बाजारों और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिसका सीधा फायदा एक्सपोर्ट को मिल रहा है.

निर्यात के साथ-साथ आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अप्रैल में कुल आयात 88.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल 82.3 अरब डॉलर था. इसमें खास बात यह है कि सामानों का आयात बढ़ा है, जबकि सेवाओं का आयात थोड़ा कम हुआ है.

इसी वजह से देश का व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर हो गया है. हालांकि सेवाओं का सरप्लस बढ़कर 20.54 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

सोने के आयात में तेज उछाल

अप्रैल में सोने के आयात में भी बड़ा उछाल देखा गया है. यह बढ़कर 5.63 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 3.1 अरब डॉलर था. आमतौर पर सोने की मांग त्योहारों, शादी-ब्याह और निवेश के चलते बढ़ती है, जिसका असर इन आंकड़ों में साफ दिखता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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