सुप्रीम कोर्ट ने कलानिधि मारन और कल एयरवेज के साथ चल रहे कानूनी विवाद मामले में फिर से दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करने की अनुमति दे दिया है. कोर्ट ने स्पाइसजेट की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दौरान दिए गए सुझाव के बाद यह अनुमति दी है. यह याचिका स्पाइसजेट और उसके प्रबंध निदेशक अजय सिंह की ओर से दायर याचिका पर दी गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान एयरलाइन विमानन क्षेत्र के लिए हाल में सरकार द्वारा शुरू की गई आपातकालीन ऋण गारंटी योजना का हवाला दिया गया. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि हम याचिककर्ताओ को 5 मई 2026 के सरकारी आदेश जैसे बाद के घटनाक्रमों के आधार पर अनुमति देते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद के घटनाक्रम में आपातकालीन ऋण गारंटी से संबंधित एक नीतिगत निर्णय शामिल है. कोर्ट ने कहा कि धारा 34 के तहत दायर याचिका के अंतिम निपटारे के लिए 18 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट विचार कर सकता है.
कलानिधि मारन और कल एयरवेज के साथ चल रहे कानूनी विवाद के सिलसिले में 144 करोड़ रुपए जमा करने के पहले के आदेश की समीक्षा की स्पाइसजेट की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. जिसके बाद स्पाइसजेट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. हाई कोर्ट ने एयरलाइन और इसके प्रमोटर अजय सिंह पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
अजय सिंह ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की
19 जनवरी को हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को निर्देश दिया था कि वे 194 करोड़ रुपये की स्वीकार की गई देनदारी के मुकाबले छह सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में 144 करोड़ रुपए जमा करें. 18 मार्च को जमा करने की समय सीमा को चार सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था.
अजय सिंह और उनकी एयरलाइन ने 18 मार्च के निर्देश पर कई आधारों पर पुनर्विचार की मांग की थी और इसमें पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुआ वित्तीय संकट का हवाला दिया गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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