PM Modi Subhashitam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय संस्कृति, वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाते रहते हैं. इसी कड़ी में आज उन्होंने एक बेहद खास और गहरा संदेश देने वाला वैदिक सूक्त साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है. पीएम मोदी ने अथर्ववेद के एक मंत्र के जरिए न सिर्फ प्रकृति और इंसान के गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया, बल्कि देश की तरक्की और समृद्धि की कामना भी की.
पीएम मोदी का आज का सुभाषितम
पीएम मोदी ने जिस श्लोक को साझा किया है, वह है:
“वनस्पते शतवल्शो वि रोह सहस्रवल्शा वि वयं रुहेम।
यं त्वामयं स्वधितिस्तेजमानः प्रणिनाय महते सौभगा।।”
क्या है इस मंत्र का मतलब?
अगर इस मंत्र को आज की सीधी-सरल भाषा में समझें, तो इसमें प्रकृति से एक सुंदर प्रार्थना की गई है. मंत्र का अर्थ है— ‘हे वनस्पति! तुम सैकड़ों शाखाओं के साथ बढ़ो, फलो-फूलो. और तुम्हारी ही तरह हम इंसान भी हजारों शाखाओं (यानी सुख, समृद्धि और कामयाबी) के साथ आगे बढ़ें. जिस कुल्हाड़ी की तेज धार से तुम्हें संवारा गया है, वह हमारे लिए बड़े सौभाग्य और उन्नति का रास्ता खोले.’
देखा जाए तो यह श्लोक सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह इंसानी जीवन और पर्यावरण के बीच के संतुलन को दिखाता है. यह संदेश देता है कि जब तक हमारी प्रकृति हरी-भरी और सुरक्षित रहेगी, तभी तक मानव सभ्यता भी तरक्की कर सकती है.
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आज के दौर में क्यों जरूरी है यह संदेश?
आज जब पूरी दुनिया क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण असंतुलन से जूझ रही है, तब हमारे वेदों का यह ज्ञान बेहद प्रासंगिक हो जाता है. प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने ‘सुभाषितम्’ (प्रेरक विचारों) के जरिए देशवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश करते हैं. उनका यह ताजा पोस्ट भी इसी बात की याद दिलाता है कि भारत का विकास तभी मुकम्मल होगा, जब हम अपनी प्रकृति और पर्यावरण को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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