Pokhran Field Firing Range: राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारत के अत्याधुनिक आत्मघाती ड्रोन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण किया गया है.यह स्वदेशी ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ यानी ऐसा ड्रोन है जो दुश्मन के इलाके में लंबे समय तक मंडराते हुए निगरानी और हमला दोनों कर सकता है.रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता में बड़ा कदम मान रहे हैं.
एक मीटर से भी कम
पुणे की रक्षा तकनीक कंपनी Nibe Limited द्वारा विकसित ‘वायु अस्त्र-1’ का परीक्षण अप्रैल में पोखरण और उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) क्षेत्र में किया गया था.कंपनी के अनुसार ड्रोन ने 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को पहली ही कोशिश में बेहद सटीकता के साथ निशाना बनाया. इसकी CEP (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) एक मीटर से भी कम बताई गई है.
दोबारा हमला किया जा सकता
ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘लोइटरिंग’ क्षमता है. यह करीब 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक हवा में रहकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है. जरूरत पड़ने पर उड़ान के दौरान ही लक्ष्य बदला जा सकता है. इसके अलावा इसमें ‘Abort Attack’ और ‘Re-Attack’ जैसी तकनीक भी मौजूद है, जिससे मिशन को बीच में रोककर दोबारा हमला किया जा सकता है.
14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई
रक्षा सूत्रों के मुताबिक ‘वायु अस्त्र-1’ का उपयोग एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर मिशनों में किया जा सकता है. रात में इन्फ्रारेड कैमरे की मदद से टैंक जैसे लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता भी परीक्षण में सफल रही. हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर इसकी उड़ान और निगरानी क्षमता का भी सफल परीक्षण किया गया.
पोखरण फायरिंग रेंज पहले भी भारत की कई बड़ी सैन्य और मिसाइल परीक्षण गतिविधियों का केंद्र रहा है.हाल ही में यहां वायु शक्ति-2026 सैन्य अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना ने आधुनिक हथियारों और ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया था.
भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे आधुनिक युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ‘वायु अस्त्र-1’ भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. यह परीक्षण ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूती देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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