Bharat Express DD Free Dish

बिहार विधान परिषद चुनाव: NDA में बन गई बात! JDU-BJP को 3-3 सीटें, चिराग और कुशवाहा को भी मिला बड़ा मौका

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए एनडीए ने लगभग सहमति बना ली है. जानकारी के अनुसार बीजेपी और जेडीयू 3-3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं. वहीं चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1-1 सीट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है.

Bihar MLC Election

Bihar MLC Election

Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में इन दिनों विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. एनडीए के भीतर लगातार बैठकों और मंथन के बीच अब सीट बंटवारे की तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही है. इस चुनाव को सिर्फ परिषद की सीटों तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे विधान परिषद चुनाव से पहले गठबंधन में दलों की ताकत और राजनीतिक महत्व तय करने वाले बड़े संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है. ऐसे में एनडीए का सीट शेयरिंग फॉर्मूला चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

सूत्रों के मुताबिक बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए एनडीए ने लगभग सहमति बना ली है. जानकारी के अनुसार बीजेपी और जेडीयू 3-3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं. वहीं चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1-1 सीट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा एक सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी गठबंधन के भीतर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है.

ये है फॉर्मूला

बताया जा रहा है कि एनडीए के अंदर कई दौर की चर्चा के बाद यह प्रारंभिक फॉर्मूला तैयार किया गया है. बीजेपी और जेडीयू, गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टियां होने के कारण बराबर हिस्सेदारी चाहती थीं, जबकि छोटे सहयोगी दलों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनडीए इस चुनाव के जरिए सहयोगी दलों को साधने और गठबंधन को मजबूत संदेश देने की रणनीति पर काम कर रहा है.

28 जून को खत्म हो रहा कार्यकाल

उधर चुनाव आयोग भी जल्द ही बिहार विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है. संभावना है कि मई के आखिरी सप्ताह या जून की शुरुआत में चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाए. दरअसल 28 जून 2026 को परिषद की 9 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिसके चलते संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समय पर चुनाव कराना जरूरी है.

ये भी पढ़ें- NEET पेपर लीक के विरोध में सीकर में NSUI का कैंडल मार्च, “रोजगार कहां है?” और “मेलोडी खाओ खुद जान जाओ” जैसे पोस्टरों के साथ जताया आक्रोश

सूत्रों की मानें तो इस बार परिषद चुनाव के जरिए उन नेताओं को भी मौका दिया जा सकता है, जिन्हें हालिया राज्यसभा चुनाव में जगह नहीं मिल पाई थी. बीजेपी और जेडीयू दोनों के पास ऐसे कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े चेहरे हैं, जिन्हें पार्टी समायोजित करना चाहती है. वहीं एलजेपी (रामविलास) और आरएलएम भी अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन में जुटी हुई हैं. माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को खास महत्व दिया जाएगा.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read