Delhi High Court Order: दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. जिसकी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 26 मई को सुनवाई करेगा. केंद्र सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया है. यह क्लब 37.3 एकड़ जमीन में है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जल्द सुनवाई की मांग की, जिसपर सुनवाई को कोर्ट तैयार हो गया है.
113 साल पुराना क्लब
जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच सुनवाई कर रही है. यह याचिका जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना ने दायर की है. यहां के सदस्यों की लिस्ट में देश के पूर्व प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, नौकरशाह, जनरल, जज और उद्योगपति शामिल है. यह 113 साल पुराना क्लब है.
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले L&DO ने 9 महीनों में क्लब प्रशासन को तीन पत्र लिखे थे. सितंबर 2025, मार्च 2026 और फिर 6 अप्रैल को ताकि DGF द्वारा एजेंसी को दिए जाने वाले 47.58 करोड़ रुपए के ग्राउंड रेंट का भुगतान किया जा सके. लेकिन DGF ने बकाया चुकाने में असफल रहा.
ठोस तथ्य या दस्तावेज पेश नहीं
जिमखाना क्लब ने दायर याचिका में केंद्र सरकार के फैसले पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं. क्लब का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के लिए डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक सिक्योरिटी और गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कारण बताए गए हैं. लेकिन इनके समर्थन में कोई ठोस तथ्य या दस्तावेज पेश नहीं किए गए है. क्लब ने इन आधारों को केवल दिखावटी और अष्पष्ट बताया है.
लैंड एंड डेवलपमेंट आफिस के माध्यम से पूरी
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने संपत्ति, भुगतान किए गए प्रीमियम और परिसर में मौजूद भवनों व अन्य संरचनाओं के नुकसान के बदले किसी प्रकार के मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं किया है. सरकार ने कहा कि 27.3 एकड़ जमीन का पूरा भूखंड जिसमें उस पर बनी सभी इमारतें, खड़ी संरचनाये, ढांचे, लॉन और फिटिंग शामिल है, पूरी तरह से पट्टा देने वाले यानी भारत के राष्ट्रपति के अधीन आ जाएगा.
यह प्रक्रिया लैंड एंड डेवलपमेंट आफिस के माध्यम से पूरी होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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