विनेश फोगाट
पहलवान विनेश फोगाट को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. साथ ही कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की ओर से दायर याचिका पर फोगाट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 1 जून को अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह बेहद चिंताजनक है. यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की खुली अदालत में नहीं सुनाया गया. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसलों पर गौर कीजिए.
सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस
वहीं फोगाट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा कि मैं सिर्फ भाग लेना चाहती हूं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप निश्चित रूप से कोई साधारण एथलीट नहीं हैं. लेकिन 14 दिसंबर 2024 को आपने अवकाश लिया और कहा कि आप अगस्त 2025 से भाग लेना शुरू करेंगी. तीन जून 2025 को आपने बताया कि अवकाश समाप्त हो गया है और आप भाग लेना शुरू करेंगी. इसके बाद जुलाई 2025 में आप मां बन गईं. पात्रता आईटीए पत्र से शुरू होती है.
उन्होंने तीन जुलाई को पत्र लिखकर कहा कि आप 1 जनवरी 2026 से पात्र होंगी. यह थोड़ा चिंताजनक है. हालांकि जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. विनेश फोगाट के वकील ने कहा कल ट्रायल है. जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि क्या आपको पता है कि ट्रायल कैसे होती है? माधवी दीवान ने कहा कि कुछ महीने पहले ही बच्चे को जन्म देने वाली महिला किसी तरह की रियायत नहीं मांग रही है. जस्टिस आराधे ने पूछा कि क्या आप पात्रता नीति के अंतर्गत पात्र हैं?
WFI के रवैये पर टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारतीय कुश्ती महासंघ ने याचिका दायर की है. दिल्ली हाई कोर्ट 22 मई को दिए अपने आदेश में विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में शामिल होने की इजाजत दी थी. अदालत ने इस दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ की तीखी आलोचना करते हुए कहा था कि फोगाट के खिलाफ महासंघ का रवैया बदले की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है और उसके बयान पिछड़ी सोच को दर्शाते हैं. मुख्य न्यायाधीश डी. के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि 30 और 31 मई 2026 को होने वाले चयन ट्रायल में विनेश फोगाट को भाग लेने दिया जाए.
ये भी पढ़ें: राजस्थान राज्यसभा चुनाव: एक तय…! बाकी 2 से कौन जाएगा दिल्ली? लिस्ट में 3 बड़े नाम
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए और उसमें भारतीय खेल प्राधिकरण तथा भारतीय ओलंपिक संघ के स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहें. डब्ल्यूएफआई के नए मानदंडों के अनुसार ट्रायल्स के लिए केवल उन्हीं पहलवानों को पात्र माना गया था, जिन्होंने 2025 और 2026 की हालिया घरेलू प्रतियोगिताओं में पदक जीते थे, जबकि पुराने शानदार प्रदर्शनों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


