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अवॉर्ड विनिंग गीतकार मनोज भावुक ने फिर जीता दिल; पति-पत्नी के प्रेम और बेटी के दर्द पर लिखे रूह में उतर जानें वाले गाने

भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता के दौर के बीच मशहूर गीतकार मनोज भावुक अपने अर्थपूर्ण और सांस्कृतिक गीतों से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं. हालिया फिल्म ‘गरीब बेटी के अमीर ससुराल’ में उनके लिखे दो गानों की हर तरफ तारीफ हो रही है.

Bhojpuri Lyricist Manoj Bhawuk Winning Hearts With Meaningful Songs

आजकल जब भी भोजपुरी सिनेमा या गानों की बात होती है, तो अक्सर अश्लीलता और फूहड़ता को लेकर बड़े सवाल खड़े किए जाते हैं. लेकिन इसी दौर में कुछ ऐसे फनकार भी हैं जो अपनी कलम की ताकत से यह साबित कर रहे हैं कि भोजपुरी संगीत की असली मिठास और शालीनता आज भी जिंदा है. ऐसे ही एक सम्मानित नाम हैं मशहूर गीतकार मनोज भावुक. मनोरंजन के साथ-साथ संस्कृति, मानवीय मूल्यों और गहरी संवेदनाओं को समेटे हुए उनके गीत सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाते हैं.

‘गरीब बेटी के अमीर ससुराल’ में बिखेरा कलम का जादू

हाल ही में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म ‘गरीब बेटी के अमीर ससुराल’ में मनोज भावुक ने दो बेहद शानदार और बिल्कुल अलग मिजाज के गीत लिखे हैं, जिनकी इन दिनों हर तरफ खूब चर्चा हो रही है. इनमें से पहला एक रोमांटिक गाना है, जो किसी पारंपरिक प्रेमी-प्रेमिका पर नहीं, बल्कि पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते, अटूट विश्वास और समर्पण को दर्शाता है. इस गीत के बोल कुछ ऐसे हैं- ‘जइसे नयना के संगे रहे निंदिया, जइसे निंदिया के संगे सपनवा रहे… ओइसही हमरा दिलवा के धड़कन में हो, सांस बनके हमेशा सजनवा रहे.’ रूप-रंग से ऊपर उठकर दिल की खूबसूरती को बयां करता यह मधुर गीत संगीत प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है.

मार्मिक टाइटल ट्रैक ने कर दिया सबको भावुक

वहीं, फिल्म का शीर्षक गीत समाज की एक कड़वी सच्चाई और गरीब बेटी की व्यथा को सामने लाता है. अमीर ससुराल में उपेक्षा और अपमान सहने के बाद जब एक बेटी मायके लौटने को मजबूर होती है, तो उसके दर्द को मनोज भावुक ने इन शब्दों में पिरोया है- ‘रोजे-रोजे ताना, रोजे-रोजे ओरहन हो, केहू नाहीं पढ़ेला ए दुखिया के मन हो… जइसे सोनवा के पिंजरा में चिरई के हाल, ओइसे गरीब बेटी के अमीर ससुराल.’

फिल्म में इन बेहद भावुक गानों को जानी-मानी अभिनेत्री ऋचा दीक्षित पर फिल्माया गया है, जिसे संगीतकार ओम झा ने अपने बेहतरीन संगीत से सजाया है. इस फिल्म के निर्माता संदीप सिंह और रामा प्रसाद हैं, जबकि निर्देशन अजय कुमार झा ने किया है.

इंजीनियरिंग छोड़ साहित्य और सिनेमा में बनाई धाक

मनोज भावुक का अपना जीवन सफर भी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक रहा है. उन्होंने लंदन और अफ्रीका में करीब एक दशक तक इंजीनियर के रूप में काम किया, लेकिन अपनी मिट्टी और भाषा के प्रति प्रेम उन्हें वापस खींच लाया. इसके बाद उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और गीत-सृजन में अपनी एक अलग पहचान बनाई.

इससे पहले वर्ष 2025 में आई फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ के लिए भी उन्हें काफी तारीफ मिली थी, जबकि फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के लिए वे बेस्ट लिरिसिस्ट का अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. गीत लिखने के अलावा उन्होंने ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ जैसी शानदार किताब भी लिखी है. उन्हें फिल्मफेयर, फेमिना, दिल्ली प्रेस और भोजपुरी भाषा शिखर सम्मान सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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