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कोलकाता बोबाजार बम ब्लास्ट: टाडा के तहत सजायाफ्ता राशिद खान की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के कोलकाता बोबाजार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद राशिद खान की समय पूर्व रिहाई के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है और पश्चिम बंगाल सरकार की अपील पर जवाब मांगा है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के कोलकाता बोबाजार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद राशिद खान की रिहाई पर रोक लगा दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने राशिद खान की रिहाई का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने अपील दायर की थी. इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने राशिद खान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को करेगा.

’30 वर्षों से जेल में हूँ और आचरण संतोषजनक रहा’ – राशिद खान की दलील

मामले की सुनवाई के दौरान राशिद खान की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 जून को उनकी रिहाई का आदेश दिया था. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वह कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, 30 वर्षों से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और जेल में उनका आचरण संतोषजनक रहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा था कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली अब केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारवादी दृष्टिकोण को भी महत्व देती है. कोर्ट ने कहा था कि राशिद खान 3 मार्च 1993 से न्यायिक हिरासत में हैं और वह लगभग 22 साल (परिहार रहित/वास्तविक अवधि) जेल में बिता चुके हैं. उन्हें टाडा (TADA) सहित अन्य धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया था. याचिकाकर्ता के वकील ने दलील देते हुए कहा था कि जेल में उनका आचरण अच्छा रहा है, उन्होंने सुधार के संकेत दिए हैं और समाज में पुनर्वास की संभावना संबंधी रिपोर्ट भी उनके पक्ष में है.

केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार ने किया रिहाई का कड़ा विरोध

वहीं केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने समय पूर्व रिहाई का विरोध किया था. केंद्र सरकार ने विरोध करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अपराधों के लिए टाडा के तहत दोषी ठहराया गया और अपराध की गंभीरता तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों से मिली नकारात्मक जानकारी के आधार पर उनकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया गया. पश्चिम बंगाल सरकार ने भी अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके असर का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया था.

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16 मार्च 1993 का वह खौफनाक मंजर: जब दहल उठा था बोबाजार

16 मार्च 1993 की रात को कोलकाता के बोबाजार क्षेत्र में हुए भीषण विस्फोट में 69 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. इस विस्फोट में कई रिहायशी इमारतें भी ध्वस्त हो गई थीं. जांच में सामने आया था कि बड़ी मात्रा में अवैध विस्फोटक सामग्री जमा किए जाने के कारण यह हादसा हुआ था.



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