Hydrogen Train: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन प्रधानमंत्री मोदी के विजन का अहम हिस्सा है. यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और आत्मनिर्भर भारत का शानदार उदाहरण है. उन्होंने बताया कि रेलवे ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए 2,400 किलोवाट का हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम तैयार किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है.
ग्रीन एनर्जी की ओर कदम
वैष्णव ने कहा कि यह तकनीक भारत की बौद्धिक संपदा है और भविष्य में इसका निर्यात भी किया जाएगा. यह ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम है और पिछले 12 वर्षों से रेलवे के आधुनिकीकरण का हिस्सा है.
ट्रेन का संचालन कहां होगा
रेलवे ने जानकारी दी कि इस हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का शुरुआती संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर होगा. यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी. इसके अलावा मार्ग में स्थित कई छोटे स्टेशनों और हॉल्ट पर भी इसका ठहराव होगा, जिससे स्थानीय यात्रियों को सुविधा मिलेगी.
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ट्रेन की खासियत
भारत में तैयार की गई इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच होंगे और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी. दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रही हाइड्रोजन ट्रेनों में आमतौर पर केवल दो या तीन कोच होते हैं और वे छोटी दूरी की सेवाओं के लिए इस्तेमाल होती हैं. भारत की यह ट्रेन क्षमता और तकनीक दोनों में अलग पहचान बनाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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