Taslima Nasrin Kolkata Visit
Taslima Nasrin Kolkata Visit: बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन अरसे बाद कोलकाता लौटने वाली हैं. इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल के वामपंथी नेताओं पर जमकर हमला बोला. उन्होंने वामपंथियों को डबल स्टैंडर्ड वाला नेता बताया. उन्होंने कहा कि बंगाल के वामपंथी नेताओं ने पहले उन्हें राज्य से निकाला, वहीं अब उन्हें BJP-RSS का समर्थक बना रहे हैं.
तस्लीमा नसरीन लगभग 19 सालों के बाद अब कोलकाता जाने की तैयारी कर रही हैं. अपने सोशल मीडिया पोस्ट में नसरीन ने बताया कि वो 1 अगस्त को कोलकाता के दौरे पर रहेंगी. यह दौरा कोई राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक सेक्युलर संगठन आयोजित कर रहा है.
न तो बीजेपी ला रही न ही पश्चिम बंगाल सरकार
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि उन्हें न तो BJP कोलकाता ला रही है और न ही पश्चिम बंगाल सरकार. यह कार्यक्रम एक सेक्युलर संगठन की ओर से आयोजित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार सिर्फ उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही है, जो उसकी सामान्य प्रशासनिक ड्यूटी है.
तस्लीमा ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने कभी उन्हें पश्चिम बंगाल से निकाला था, वही अब यह प्रचार कर रहे हैं कि कोलकाता में कदम रखते ही वे हिंदुत्व समर्थक या RSS समर्थक बन जाएंगी. उन्होंने इसे झूठा प्रचार और राजनीतिक पाखंड बताया.
वामपंथी नेताओं पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
लेखिका ने वामपंथी नेताओं पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि CPI(M) सरकार के निमंत्रण पर वे कई बार केरल गई थीं. वहां उन्हें Z+ सुरक्षा दी गई और उनका खुले तौर पर स्वागत हुआ. तस्लीमा ने पूछा कि उस समय इन नेताओं ने उन्हें लेफ्टिस्ट कहकर गाली दी थी या उनके आने का स्वागत किया था?
उन्होंने अपनी पोस्ट में इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनके सिर्फ दो दिन के कोलकाता दौरे को लेकर इतना विवाद और प्रोपेगैंडा क्यों फैलाया जा रहा है. तस्लीमा ने कहा कि वे 18 साल, 8 महीने और 10 दिन बाद अपने सांस्कृतिक शहर कोलकाता लौट रही हैं.
तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी बोला हमला
तस्लीमा नसरीन ने पश्चिम बंगाल की अलग-अलग सरकारों पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि लेफ्ट फ्रंट सरकार ने उन्हें राज्य से बाहर किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उन्हें आने से रोका. उनके मुताबिक, उनके लेखों का प्रसारण रोका गया और किताब के लॉन्च कार्यक्रम तक रद्द कराए गए.
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लेखिका ने कुछ वामपंथी नेताओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों को खुश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में सुधार, महिला अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मुद्दों पर ये नेता चुप्पी साध लेते हैं. पोस्ट के अंत में तस्लीमा ने सवाल किया कि आखिर कब तक कुछ लोग प्रगतिशीलता का मुखौटा पहनकर कट्टरपंथियों की भाषा बोलते रहेंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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