CJP Parliament March Controversy: दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित ज्यादतियों को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है. साथ नही कोर्ट ने सीसीटीवी सहित अन्य सबूत को संरक्षित रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट 11 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन, वरिष्ठ वकील विकास सिंह और वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलीलें रखी. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, लोग संविधान से मिले अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे थे, सबसे पहली आजादी जिसका वे इस्तेमाल कर रहे थे, वह भी शांतिपूर्ण विरोध और सभा करने का अधिकार. छात्रों को अनुच्छेद 21 के तहत भी सुरक्षा मिली हुई थी. इसलिए सरकार की कार्रवाई को अनुच्छेद 14 के तहत परख जायेगा. इसके बाद जो हुआ वह अकल्पनीय था. हद से ज्यादा बर्बरता की गई. मैं यह बिल्कुल नहीं कह रहा कि सरकार के पास इस आंदोलन को नियंत्रित करने या उसे सही दिशा देने की क्षमता नही थी. वही वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई को वे संसद तक मार्च करेंगे. असल मे सभी लोग 20 जुलाई को ही इक्कठा हुए थे.
19 जुलाई को कोई हिंसा नही हुई थी. संसद तक मार्च करने की जानकारी सार्वजनिक होने के कारण 20 जुलाई को भीड़ बढ़ने लगी और इसी भीड़ पर हमला किया गया. यह लड़के -लड़कियों की भीड़ थी. इसमें मिस्टर हेगड़े का बेटा भी शामिल थे. हर तरह के बैकग्राउंड से आए बच्चे वहां मौजूद थे. उन्होंने कहा कि ऐसे कई वीडियो हैं जिनमें सादे कपड़ो में कुछ लोग बैठे दिख रहे है.
पुलिसकर्मियों पर नेम टैग नहीं लगाने का आरोप
उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शनकरियों पर हमला किया. हरिहरन ने कहा कि कई ऐसे वीडियो हैं, जिन्हें कोर्ट देखे. उनमें किले लगी लाठियां दिख रही है, जिनसे बच्चों को पीटा जा रहा है. पेलेट्स और इलेक्ट्रिक बैटल का इस्तेमाल किया गया. क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से इसी तरह निपटा जाएगा? विकास सिंह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने नेम टैग नहीं लगाए हुए थे. हरिहरन ने कहा कि लोगों के इकठ्ठा होने का मकसद कानूनी था. वे नीट परीक्षा के बारे मे अपनी शिकायते बताना चाहते थे. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. इसलिए मैं चाहता हूं कि आप इन वीडियो देखें. कम से कम जिन पुलिसकर्मियों की पहचान हो सकती है.उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. हरिहरन ने कहा कि हम इस मामले में एसआईटी के गठन की मांग कर रहे है.
बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मियों की मौजूदगी का आरोप
वही वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि मैंने ऐसे 130 से ज्यादा वीडियो देखें है. ये वीडियो इसलिए अहम है, क्योंकि इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग दिख रहे है जिन्होंने पुलिस की वर्दी नही पहनी थी. एक वीडियो में एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा एक महिला को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं,जबकि वह महिला कुछ भी नही कर रही थी. उन्हें तलब किया जाना चाहिए. उन्होंने रामलीला मैदान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक आंसू गैस का इस्तेमाल आखिरी विकल्प होना चाहिए. सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि नीट में असल मे अमीर लोगों को ही सरकारी सीट मिलती है. गरीबो को कुछ नही मिलता है. बच्चे आत्महत्या कर रहे है, जो बहुत दुःखद है. जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सोनम वांगचुक या उनकी पत्नी ने कोई एफआईआर दर्ज नही कराया है.
शांतिपूर्ण नहीं था विरोध प्रदर्शन- दिल्ली पुलिस
ऐसा लगता है कि यह याचिका सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर की गई है. चूंकि बहुत से लोगों की इसमें दिलचस्पी है, इसलिए आप यह मुद्दा उठा रहे है. एएसजी राजू ने याचिका को खारिज किये जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह एक जानी मानी बात है कि तथाकथित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया गया है. कुछ राजनीतिक पार्टियां इसका फायदा उठाना चाहती है. इसलिए यह कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन नही था. पुलिसकर्मियों के घायल होने का वीडियो मौजूद है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. क्योंकि भीड़ बेकाबू हो गई थी और उसने हिंसा का सहारा लिया. एएसजी राजू ने कहा कि वीडियों मौजूद है जिनसे पता चलता है कि भीड़ पत्थरबाजी कर रही थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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