रिपोर्ट – विष्णु आशीर्वाद
चलती ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री के लिए एक पूर्व छात्रनेता देवदूत बनकर सामने आए. बांदीकुई से गुजरी एक ट्रेन में अचानक यात्री की धड़कनें थमने लगीं और वह बेहोश हो गया. लेकिन वहां मौजूद पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष की सूझबूझ और 10 मिनट तक दी गई सीपीआर (CPR) तकनीक ने मरते हुए इंसान की सांसें वापस ला दीं. इस भावुक और साहसी वाकये की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है.
तबीयत बिगड़ने से मचा हड़कंप
मिली जानकारी के मुताबिक, खजुराहो से अजमेर जा रही ट्रेन संख्या 19665 के एस-5 कोच में मुकेश रैकवाल नाम के यात्री सफर कर रहे थे. सीट नंबर 65 पर बैठे मुकेश की अचानक तबीयत काफी बिगड़ गई और देखते ही देखते वह अचेत होकर गिर पड़े. यात्री की ऐसी हालत देख पूरे डिब्बे में अफरा-तफरी मच गई. मौके की नजाकत को समझते हुए ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के एएसआई अमर सिंह कसाना और कांस्टेबल हरिओम गुर्जर तुरंत मदद के लिए आगे आए.
10 मिनट का CPR और लौट आई जिंदगी
उसी कोच में सफर कर रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह प्रभाकर ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला. उन्होंने तुरंत अचेत पड़े मुकेश को लगातार करीब 10 मिनट तक सीपीआर देना शुरू किया. इंद्रजीत की इस कोशिश और हिम्मत का नतीजा यह रहा कि कुछ ही देर में यात्री के शरीर में हरकत हुई और उसकी रुकी हुई सांसें वापस लौट आईं.
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रेलवे स्टाफ की सतर्कता की तारीफ
घटना के बाद दौसा रेलवे स्टेशन आते ही आरपीएफ, जीआरपी और टीटीई की संयुक्त टीम ने सतर्कता दिखाते हुए मुकेश को ट्रेन से सुरक्षित नीचे उतारा. सहयात्री विजय और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने बिना देरी किए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया. घटना की पूरी जानकारी जयपुर डीएससीआर को भेज दी गई है. समय पर मिले सीपीआर और रेलवे स्टाफ की तत्परता की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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