ग्लोबल टेक दिग्गज गूगल को यूरोपीय संघ (EU) की तरफ से बहुत बड़ा झटका लगा है. डिजिटल प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन और एकाधिकारवादी रवैये के चलते यूरोपीय आयोग ने गूगल पर 89 करोड़ यूरो (लगभग 1 अरब डॉलर यानी करीब ₹9,000 करोड़) का भारी जुर्माना लगाया है. आयोग का स्पष्ट आरोप है कि गूगल अपने सर्च इंजन और ऐप इकोसिस्टम में अपनी ही सेवाओं को प्राथमिकता देता है और प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है.
दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई
यूरोपीय आयोग ने गूगल की सर्च गतिविधियों में धांधली के लिए 46 करोड़ यूरो और गूगल प्ले स्टोर के नियमों के उल्लंघन के लिए 43 करोड़ यूरो का अलग-अलग जुर्माना लगाया है. आयोग की कार्यकारी उपाध्यक्ष टेरेसा रिबेरा ने कहा कि गूगल डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) के अनुपालन में पूरी तरह विफल रहा. जांच में सामने आया कि गूगल अपने सर्च रिजल्ट्स में शॉपिंग, होटल, स्पोर्ट्स और ट्रांसपोर्ट जैसी अपनी सेवाओं को थर्ड-पार्टी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊपर दिखाता है.
इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर पर ऐप डेवलपर्स को बाहरी या सस्ते विकल्पों का प्रचार करने और यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म से बाहर ले जाने पर रोक लगाता था, जो नियमों के खिलाफ है.
60 दिनों का अल्टीमेटम और वैश्विक आय का 5% फाइन
ईयू ने गूगल को 60 दिनों के भीतर इन उल्लंघनों को तुरंत बंद करने और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है. यदि गूगल तय सीमा में सुधार नहीं करता, तो उस पर उसकी वैश्विक कुल आय का 5% तक अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है.
क्या भारत में भी होना चाहिए ऐसा एक्शन?
यूरोप के इस कड़े फैसले के बाद अब भारत में भी बहस छिड़ गई है. भारत दुनिया में गूगल के सबसे बड़े बाजारों में से एक है. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भी पहले एंड्रॉयड और प्ले स्टोर नीतियों को लेकर गूगल पर कार्रवाई कर चुका है. तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय स्टार्टअप्स, लोकल ऐप डेवलपर्स और निष्पक्ष डिजिटल बाजार के हित में भारत को भी यूरोपीय संघ की तर्ज पर ‘डिजिटल कॉम्पिटिशन बिल’ को जल्द लागू करना चाहिए, ताकि बड़ी टेक कंपनियों की मनमानी पर लगाम लग सके.
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