जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनके लिए राष्ट्रसेवा हमेशा जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है और उन्होंने इसी भावना के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं.
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं. धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर भाजपा और एनडीए के कई बड़े नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी समेत कई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने पहुंचे. नेताओं ने उनसे मुलाकात कर आगे की रणनीति और उनके योगदान को लेकर चर्चा की.
पीयूष गोयल ने की धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा और सार्वजनिक सेवा की तारीफ की. उन्होंने कहा कि यह मौका उनके दशकों लंबे समर्पण और देश निर्माण में दिए गए योगदान को याद करने का है.
गोयल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का जुड़ाव शुरुआत से ही छात्र आंदोलनों और युवाओं से रहा है. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और हर भूमिका को पूरी ईमानदारी, मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ निभाया. उनके मुताबिक, लोगों से जुड़ने, अलग-अलग पक्षों को साथ लेकर चलने और लंबे समय के लक्ष्यों पर काम करने की क्षमता धर्मेंद्र प्रधान की खास पहचान रही है.
उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए गए कामों का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा सुधार कोई एक दिन में पूरा होने वाला काम नहीं है. इसके लिए धैर्य, लगातार संवाद और भविष्य की जरूरतों को समझने की सोच जरूरी होती है. धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय में रहते हुए इन बातों को प्राथमिकता दी.
धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं के प्रति जताई प्रतिबद्धता
इस्तीफे से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की थी. इसमें उन्होंने लिखा कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों के लिए काम करते आए हैं.
उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत, समावेशी और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई शिक्षा व्यवस्था ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव तैयार करती है. उन्होंने देश के युवाओं की उम्मीदों, भावनाओं और उनकी जायज मांगों के प्रति सम्मान जताया.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में आगे की जिम्मेदारियों और मंत्रालय में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की ओर से आगे की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.
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-भारत एक्सप्रेस
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