Parshuram Mahadev Temple
Parshuram Mahadev Temple: राजस्थान के पाली और राजसमंद जिले की सीमा पर अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित परशुराम महादेव तीर्थ देश के प्राचीन और चमत्कारी शिव धामों में गिना जाता है. समुद्र तल से करीब 3,955 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की तपोस्थली मानी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम के दर्शन से पहले यहां भगवान परशुराम महादेव के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसी आस्था के चलते हर वर्ष अक्षय तृतीया से पहले लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर “पटधारी” बनते हैं.
परशुराम की तपस्या से जुड़ा है इस गुफा का इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने भगवान गणेश की कठोर तपस्या के बाद दिव्य “परशु” प्राप्त किया था. इसके बाद उन्होंने अरावली पर्वत को अपने परशु से चीरकर इस प्राकृतिक गुफा का निर्माण किया और भगवान शिव की कठोर आराधना की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए. तभी से यह स्थान परशुराम महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
स्वयंभू शिवलिंग और 24 घंटे होने वाला प्राकृतिक जलाभिषेक
इस गुफा का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थापित स्वयंभू प्राकृतिक शिवलिंग है. मान्यता है कि शिवलिंग पर भगवान शिव परिवार का दिव्य स्वरूप विद्यमान है. शिवलिंग के ऊपर बने गौमुख से चौबीसों घंटे प्राकृतिक रूप से जल की धारा गिरती रहती है, जिसे गंगाजल माना जाता है. श्रद्धालु इसे भगवान शिव का अखंड जलाभिषेक मानकर दर्शन करते हैं. गुफा के भीतर बने विभिन्न कुंडों को देश की पवित्र नदियों का प्रतीक माना जाता है और इनमें वर्षभर जल भरा रहता है.
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कामधेनु गुफा और मनोकामना पूरी होने की मान्यता
गुफा के प्रवेश द्वार पर कामधेनु के आकार की प्राकृतिक संरचना बनी हुई है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यदि यहां से टपकने वाली जल की बूंद किसी श्रद्धालु के माथे पर गिर जाए तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है. इसी विश्वास के कारण देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस तीर्थ में पहुंचते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
सावन में बढ़ जाता है तीर्थ का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम ने भगवान शिव से वरदान मांगा था कि सावन मास में वे अपने पूरे परिवार के साथ इस गुफा में अदृश्य रूप से विराजमान रहें और यहां आने वाले भक्तों के पापों का नाश कर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें. यही कारण है कि सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और घंटों कतार में लगकर भक्त दर्शन करते हैं.
बद्रीनाथ यात्रा से जुड़ी है विशेष मान्यता
मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 10,279 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि परशुराम महादेव 3,955 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि परशुराम महादेव के दर्शन के बाद ही बद्रीनाथ यात्रा पूर्ण फलदायी होती है. यही वजह है कि यह तीर्थ आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
भारत एक्सप्रेस
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