सुप्रीम कोर्ट ने रुस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में मारे गए या घायल हुए भारतीयों के परिजनों से समन्वय के लिए विदेश मंत्रालय को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है. अदालत ने विधिक सेवा प्राधिकरणों से कहा कि वे परिवारों को उनके परिजनों के शव प्राप्त करने और मुआवजे के लिए दावा दायर करने में मदद करें.
कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से दिल्ली स्थित दूतावास में मुआवजा दावा दाखिल करने में परिजनों की मदद करने को कहा है. कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से यह भी कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों के शवों की उनके परिवार के सदस्यों के साथ डीएनए जांच कराने की व्यवस्था करने को कहा है. इनसे पहले सरकार ने कोर्ट को बताया था कि 26 व्यक्तियों में से दुर्भाग्य से 10 की मौत हो गई है.
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया था कि विदेश मंत्रालय सभी प्रभावित नागरिकों के परिवारों के संपर्क में है और स्थिति से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रहा है. कई व्यक्तियों ने रूसी संस्थाओं के साथ स्वैच्छिक अनुबंध किए थे, हालांकि ऐसे भी उदाहरण थे जहां एजेंटों ने उन्हें गुमराह किया हो सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि इस मामले को समझदारी से निपटाने की आवश्यकता है. एएसजी भाटी ने बताया था कि कुल 215 भारतीय रूस गए हैं, जिनमें से 26 के परिवार के सदस्य सुप्रीम कोर्ट आए हैं.
प्रभावित परिवारों के लगातार संपर्क में है विदेश मंत्रालय- केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया था कि मंत्रालय लगातार परिवार के संपर्क में है. इसपर सीजेआई ने कहा था कि यूक्रेन युद्ध में एक व्यक्ति की मौत की जानकारी समाचार पत्र के जरिए हासिल हुई है. एएसजी भाटी ने कहा था कि वह याचिककर्ताओ में से एक के परिवार के सदस्य था. एएसजी भाटी ने कहा था कि सरकार ने शव को वापस लाने की व्यवस्था कर ली है. लेकिन संबंधित परिवार के असहयोग के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. यह याचिका 26 भारतीय नागरिकों के परिवार वालों की ओर से दायर की गई है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
यह याचिका वकील ऋत्विक भनोत, अध्ययन गुप्ता और आयुष शंकर द्वारा दायर की गई है.
दायर याचिका में केंद्र सरकार के साथ राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सरकारों और भारत में स्थित रूसी दूतावास को भी पक्षकार बनाया गया है. दायर याचिका में कहा गया है कि इन लोगों को रूस में बंधक बनाकर जबरन युद्ध लड़ने के लिए भेज दिया गया है. ये सभी भारतीय छात्र या पर्यटक वीजा पर रुस गए थे. दायर याचिका में उन सभी भारतीय नागरिकों के कथित प्रत्यर्पण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. जो छात्र या पर्यटक वीजा पर रुस गए थे और अब कथित तौर पर यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में भाग लेने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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