आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चिंता बन चुका है. खासकर बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, शारीरिक समस्याएं और सामाजिक बदलाव कई लोगों को डिप्रेशन की ओर धकेल देते हैं. संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया भर में करीब 28 करोड़ लोग डिप्रेशन से प्रभावित हैं. वहीं, 5.7 प्रतिशत बुजुर्ग भी इस मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई एक नई रिसर्च उम्मीद की किरण लेकर आई है.
इस लंबे अध्ययन में पता चला है कि जिन बुजुर्गों का घर ऐसे इलाकों में है जहां पेड़ों की संख्या ज्यादा है और आसपास हरियाली बनी रहती है, उनमें उम्र बढ़ने के साथ डिप्रेशन के लक्षण अपेक्षाकृत कम देखने को मिले. शोधकर्ताओं का मानना है कि शहरों में हरित वातावरण बढ़ाना सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है.
12 साल तक किया गया अध्ययन
यह शोध ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के सिडनी सेंटर फॉर हेल्दी ब्रेन एजिंग (CHEBA) और ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी के सहयोग से किया गया. अध्ययन में 70 से 90 वर्ष की आयु के एक हजार से अधिक बुजुर्गों को शामिल किया गया. करीब 12 वर्षों तक उनके स्वास्थ्य और रहने के वातावरण का विश्लेषण किया गया.
यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर्स में प्रकाशित हुआ है. शोध में पाया गया कि जिन लोगों ने लंबे समय तक पेड़ों से घिरे इलाकों में जीवन बिताया, उनमें अवसाद के लक्षण समय के साथ कम बने रहे.
किन-किन बातों की हुई जांच?
रिसर्च टीम ने सिर्फ पेड़ों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे वातावरण का भी आकलन किया. इसमें पार्कों की उपलब्धता, समुद्र, नदी और झील जैसे जल स्रोतों तक पहुंच, रोजमर्रा की सुविधाओं की उपलब्धता और वायु प्रदूषण जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया.
हालांकि, अध्ययन के नतीजों में एक दिलचस्प बात सामने आई. शोधकर्ताओं को पार्क, समुद्र या अन्य जल क्षेत्रों तक पहुंच, कम वायु प्रदूषण या जरूरी सेवाओं की उपलब्धता का डिप्रेशन पर कोई स्पष्ट और लगातार असर नहीं मिला. इसके विपरीत, पेड़ों से भरपूर इलाकों में रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक सकारात्मक कारक के रूप में सामने आया.
शहरों की योजना में हरियाली को मिले प्राथमिकता
शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया भर में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग हर पांचवें व्यक्ति पर डिप्रेशन का असर देखा जाता है. ऐसे में शहरों की योजना बनाते समय ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना और हरित क्षेत्रों का विस्तार करना बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है.
हालांकि यह अध्ययन पेड़ों और कम डिप्रेशन के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह सीधे तौर पर यह साबित नहीं करता कि केवल पेड़ ही डिप्रेशन को रोकते हैं. फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाली से भरपूर वातावरण लोगों को मानसिक सुकून देता है, तनाव कम करने में मदद करता है और स्वस्थ उम्र बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है.
यह भी पढ़ें- फिर लौटा नीले ड्रम का खौफ… 5 दिन की मासूम का शव बरामद, जिसने दी जिंदगी उसी ने छीन ली सांसें
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

