अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवारजनों और करीबियों के स्वामित्व वाली निजी कंपनियों को करोड़ों रुपये के सार्वजनिक निर्माण कार्यों के सरकारी ठेके (Tenders) आवंटित करने के आरोपों से जुड़ी सीबीआई (CBI) जांच में राज्य सरकार के असहयोग पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने गहरा आक्रोश जताया है और गंभीर सवाल उठाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल की गई गोपनीय स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह सख्त रुख अपनाया है. पीठ ने कहा कि सीबीआई की रिपोर्ट से साफ जाहिर होता है कि जांच के लिए अति-आवश्यक प्रशासनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के मामले में अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से रत्ती भर भी सहयोग नहीं किया जा रहा है.
24 अगस्त को पेश होने का नोटिस
शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और प्रधान सचिव – गृह (Principal Secretary – Home) को आगामी 24 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से (In-Person) पेश होने का कड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों शीर्ष अधिकारियों को पीठ के सामने हाजिर होकर यह स्पष्टीकरण देना होगा कि जांच एजेंसी सीबीआई से असहयोग करने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन न करने के पीछे आखिर क्या कारण हैं.
रिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की तीखी दलीलें
पिछली सुनवाइयों में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में स्थितियां बेहद चौंकाने वाली हैं और पूरे राज्य को किसी निजी कंपनी (Private Company) की तरह चलाया जा रहा है.
प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया था कि राज्य के सभी बड़े और महत्वपूर्ण निर्माण ठेके मुख्यमंत्री की पत्नी, उनके चचेरे भाइयों और करीबियों की कंपनियों को बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के दे दिए गए हैं. जब कोर्ट ने भूषण से पूछा कि यह कितना बड़ा मामला है, तो उन्होंने बताया था कि यह सैकड़ों करोड़ रुपये की धांधली का मामला है, जिसमें मुख्यमंत्री की पत्नी से संबंधित कंपनी को ही अकेले सैकड़ों करोड़ रुपये के 70 ठेके आवंटित किए गए हैं.
इन प्रमुख कंपनियों और रिश्तेदारों को ठेके देने के हैं आरोप:
मेसर्स ब्रांड ईगल्स (M/s Brand Eagles): मुख्यमंत्री पेमा खांडू की पत्नी से संबंधित निर्माण कंपनी, जिसे प्रमुख निविदाएं (Tenders) देने में भारी पक्षपात का आरोप है.
मेसर्स एलायंस ट्रेडिंग कंपनी (M/s Alliance Trading Company): तवांग जिले से विधायक और पेमा खांडू के भतीजे श्री त्सेरिंग ताशी के स्वामित्व वाली कंपनी, जिसे उचित कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्य संविदाएं प्रदान की गईं.
CAG रिपोर्ट पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि मार्च 2025 में ही केंद्र सरकार, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और वित्त मंत्रालय को इस पूरे मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था.
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अदालत ने रुख साफ करते हुए कहा था कि केवल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट इस तरह के संवेदनशील मामले में पर्याप्त नहीं है. कोर्ट को केंद्रीय मंत्रालयों से सीधी और निष्पक्ष रिपोर्ट चाहिए ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि किन-किन निजी कंपनियों को सार्वजनिक ठेके दिए गए, टेंडर प्रक्रिया का सही पालन हुआ या नहीं और इन सबके पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन लोग हैं.
राज्य सरकार का रुख
दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग बताया. राज्य सरकार का कहना है कि सीएजी (CAG) ने अपनी रिपोर्ट पहले ही कोर्ट को सौंप दी है, जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार जो कुछ भी कर रही है वह कानून और नियमों के दायरे में रहकर कर रही है. राज्य सरकार के अनुसार, यह याचिका पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और कुछ ऐसे लोगों के समूह द्वारा दायर की गई है जो सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश में विकास कार्य नहीं देखना चाहते. फिलहाल, 24 अगस्त 2026 को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं जब राज्य के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों का जवाब देना होगा.
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