Surgical Anesthesia Discovery History: 9 अगस्त 1819 को अमेरिका में जन्मे विलियम थॉमस ग्रीन मॉर्टन आधुनिक चिकित्सा इतिहास के उन महान नामों में से एक हैं, जिन्होंने सर्जरी को दर्द से मुक्त करने का रास्ता खोला. अमेरिकी डेंटिस्ट मॉर्टन को सर्जिकल एनेस्थीसिया की दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ाने वाला व्यक्ति माना जाता है.
बिना दर्द ऑपरेशन का पहला प्रयोग
30 सितंबर 1846 को उन्होंने पहली बार सल्फ्यूरिक एथर (ईथर) का उपयोग दांत के एक छोटे ऑपरेशन में किया. इससे पहले सर्जरी का मतलब था असहनीय दर्द. मॉर्टन ने दिखाया कि रोगी को बेहोश करके ऑपरेशन संभव है. उन्होंने एक खास डिलीवरी उपकरण भी बनाया, जिससे ऑपरेशन के दौरान मरीज को एथर सुरक्षित तरीके से दिया जा सके.
पेटेंट को लेकर आज भी विवाद
मॉर्टन ने एथर को ‘लीथियोन’ नाम दिया और उस पर पेटेंट का दावा किया. हालांकि इस दावे पर काफी विवाद और आलोचना हुई. कई लोग मानते थे कि एथर के एनेस्थेटिक गुणों की खोज में अन्य वैज्ञानिकों का भी योगदान था.
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मॉर्टन को यह साबित करने में पूरी सफलता नहीं मिली कि वे एथर की इस संपत्ति के खोजकर्ता पहले व्यक्ति हैं. जीवन के अंतिम वर्षों में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए 15 जुलाई 1868 को उनकी मृत्यु हो गई.
दर्दमुक्त सर्जरी में दिया बड़ा योगदान
आज सर्जरी में एनेस्थीसिया सामान्य बात है, लेकिन दो सौ साल पहले यह क्रांति जैसी थी. मॉर्टन का जन्मदिन हमें याद दिलाता है कि एक डेंटिस्ट की हिम्मत और प्रयोग ने पूरी दुनिया की सर्जरी को दर्दमुक्त बनाने में कितना बड़ा योगदान दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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