Bharat Express DD Free Dish

बच्चों के अपहरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी, जानिए पूरा मामला

बच्चों के अपहरण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है. याचिका में स्पेशल कोर्ट और अवैध संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है.

Supreme Court Issues Notice To Center And States On Child Kidnapping PIL Bharat Express

बच्चों के अपहरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (AI IMAGE)

Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के अपहरण के मामलों को तय समय में जांच और इससे अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार सहित देश के सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार, देश के सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश, गृह मंत्रालय लॉ कमीशन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

जल्द सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट की मांग

दायर याचिका में पूरे देश में एक समान जांच व्यवस्था, समयबद्ध जांच और विशेष जांच प्रक्रिया की मांग की गई है. साथ ही ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने की मांग की गई है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है.

दायर याचिका में केंद्र सरकार और देश के सभी राज्य सरकारों से बच्चों के अपहरण से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक समान स्टैंडर्ड इन्वेस्टिगेशन प्रोसीजर (एसआईपी) बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है.

दायर याचिका में कहा गया है कि बच्चों के अपहरण के मामलों में कई बार सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट या सामान्य डायरी एंट्री की जाती है. इससे आपराधिक जांच शुरू होने में देरी होती है. लिहाजा ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज कर समय सीमा के भीतर जांच को पूरा करने के निर्देश देने की मांग की गई है. साथ ही तत्काल बच्चे की तलाश शुरू करने की मांग की गई है.

बच्चों को खोजने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग

दायर याचिका में कहा गया है कि अपहरण के मामलों की जांच एसीपी या एसएसचो से नीचे के अधिकारी द्वारा न कराया जाए. ताकि मामलों की निगरानी और जांच प्रभावित तरीके से हो सके. दायर याचिका में बच्चों को खोजने के लिए रियल टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, डिजिटल और फॉरेंसिक जांच तथा विशेष रूप से प्रशिक्षित जांच अधिकारियों की व्यवस्था करने की जरूरत बताई गई है.

याचिका में अपहरण से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने की मांग की गई है. इन अदालतों में ऐसे मामलों का ट्रायल एक साल के भीतर पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है. इसके अलावे दायर याचिका में आरोपियों की संपत्तियों की जांच कर मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और ब्लैक मनी से जुड़े कानूनों के इस्तेमाल तथा अपहरण से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की मांग की गई है.

बच्चों के अपहरण का संबंध

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि अपहरण के मामलों में मिलने वाली सजाएं लगातार चलने वाली यानी लगातार होनी चाहिए, ताकि अपराधियों के बीच प्रभावी रोकथाम पैदा हो. दायर याचिका में दावा किया गया है कि बच्चों के अपहरण का संबंध कई मामलों में मानव तस्करी, अवैध गोद लेने, जबरन मजदूरी, यौन शोषण, भीख मंगवाने, बाल विवाह और अन्य अपराधों से जुड़ सकता है.

याचिका के अनुसार, जांच में देरी होने से बच्चों को सुरक्षित बरामद करने की संभावना कम होती है और उनके तस्करी या शोषण का खतरा बढ़ जाता है. दायर याचिका में जून-जुलाई 2026 के कई मामलों का भी उल्लेख किया गया है.

इनमें दिल्ली में नवजात बच्चों को कथित तौर पर बेचने वाले गिरोह का मामला, दिल्ली के महरौली में 10 साल की बच्ची के अपहरण के बाद हत्या, हैदराबाद में मां की गोद से एक महीने की बच्ची के अपहरण और राजस्थान व उदयपुर से जुड़े बच्चों की तस्करी के मामलों का जिक्र किया गया है.

यह भी पढ़ें:अभिभावकों की सहमति के बिना बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read