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ट्रिब्यूनल रिक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने एडहॉक व्यवस्था जारी रखने और खाली पद भरने पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों में खाली पदों और नियुक्तियों पर सुनवाई करते हुए कहा है कि रिक्तियों से व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.

Supreme Court News

ट्रिब्यूनलों में खाली पड़े पदों और लंबित नियुक्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि रिक्तियों (Vacancies) के कारण ट्रिब्यूनल की पूरी व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. अदालत इस मामले पर अब 16 सितंबर को आगे सुनवाई करेगी.

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले को अभी समाप्त न किया जाए और सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की जाए, जिस पर अदालत सहमत हो गई.

अंतरिम अर्जियों पर एजी की दलील: अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि एक DRAT (ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण) सदस्य का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है, जिसे लेकर अंतरिम अर्जी दाखिल की गई है. एजी ने कहा कि ऐसी स्थिति में इन अंतरिम अर्जियों पर शायद विचार नहीं किया जाना चाहिए, और यदि नियुक्तियों में एक-दो महीने का समय लग भी जाता है तो इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा.

CJI की दो टूक

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सरकार अपने स्तर पर मौजूदा एडहॉक (तदर्थ) व्यवस्था को एक महीने या कुछ समय के लिए बढ़ाने का निर्णय ले सकती है, ताकि ट्रिब्यूनल का कामकाज और न्यायिक प्रक्रिया बिल्कुल भी बाधित न हो? अटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया कि सरकार इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी.

‘रिक्तियों के कारण ट्रिब्यूनल निष्क्रिय नहीं होने चाहिए’

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट और निश्चित आश्वासन देना होगा कि खाली पदों को तय समय सीमा के भीतर भर दिया जाएगा. सीजेआई ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि अभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया और उसके बाद नई नियुक्तियां समय पर नहीं हुईं, तो भविष्य में फिर से इसी तरह की याचिकाएं और मुकदमे शुरू होने लगेंगे.

अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट में नियुक्तियों और ट्रिब्यूनलों से संबंधित पूरी विधिक व्यवस्था मौजूद है, इसलिए इस स्तर पर कोई कठोर आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य चिंता यह है कि पदों के खाली रहने के कारण कोई भी ट्रिब्यूनल निष्क्रिय स्थिति में न पहुंचे, और जरूरत पड़ने पर वर्तमान व्यवस्था को कुछ समय के लिए एडहॉक आधार पर जारी रखा जा सकता है.



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