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UCC और फरक्का संधि पर बढ़ी सियासी सरगर्मी, JDU ने 18 सितंबर को बुलाई बड़ी बैठक; सभी सांसद-विधायक पटना तलब

JDU Patna Meeting: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और फरक्का जल संधि को लेकर जारी चर्चाओं के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 18 सितंबर को पटना में अपने सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की अहम बैठक बुलाई है.

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JDU ने 18 सितंबर को बुलाई बड़ी बैठक

JDU Patna Meeting: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और फरक्का जल संधि को लेकर जारी चर्चाओं के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 18 सितंबर को पटना में अपने सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की अहम बैठक बुलाई है. यह बैठक सुबह 10 बजे से पार्टी कार्यालय में आयोजित होगी और इसे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पार्टी की ओर से इसे आधिकारिक तौर पर ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ या ओरिएंटेशन सेशन बताया गया है. इसमें जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली, नियमों और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी. हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बैठक में केवल विधायी प्रशिक्षण तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर भी मंथन हो सकता है.

फरक्का जल संधि को लेकर होने वाली है चर्चा

सबसे ज्यादा नजरें फरक्का जल संधि को लेकर होने वाली चर्चा पर टिकी हैं. जेडीयू पिछले कुछ समय से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है. पार्टी का दावा है कि 1996 में हुई फरक्का संधि के कारण बिहार को बाढ़, सुखाड़ और गाद जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है. दिसंबर 2026 में इस संधि की अवधि समाप्त हो रही है और जेडीयू लगातार इसे आगे नहीं बढ़ाने की मांग कर रही है. सूत्रों का कहना है कि बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद पार्टी अपना औपचारिक रुख स्पष्ट कर सकती है.

UCC को लेकर अमित शाह से अलग है राह

इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी जेडीयू की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी. हाल के दिनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आई हैं. जेडीयू के कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बिहार में UCC लागू नहीं होना चाहिए. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि बैठक में इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा हो और पार्टी अपनी रणनीति स्पष्ट करे.

जनप्रतिनिधियों से मांगी जाएगी रिपोर्ट

बैठक में जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्रों की राजनीतिक रिपोर्ट भी मांगी जा सकती है. संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं का मनोबल, जनता के बीच पार्टी की पकड़ और आगामी चुनावी रणनीति जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रह सकते हैं.

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जेडीयू अपनी अलग राजनीतिक पहचान को और मजबूत करने की कोशिश में है. ऐसे में 18 सितंबर की यह बैठक सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा और रणनीति तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है.

-भारत एक्सप्रेस



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