Jantar Mantar Violence: सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच को लेकर बनाई गई हाई पावर्ड इंकवायरी कमेटी के पुनर्गठन की मांग को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वह 14 साल की एक प्रदर्शनकरी की सुरक्षा करने को कहा है, जिसे अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा है. साथ ही, कोर्ट ने जिम्मेदार लोगों की जल्द जांच कर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश जारी किया है. दायर याचिका में कमेटी में शामिल सदस्यों पर सवाल उठाए गए थे. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण, वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण और अभिषेक मनु सिंघवी ने कमेटी में शामिल एक सदस्य जो उत्तर-पूर्वी राज्य के रिटायर्ड डीजीपी पर सवाल उठाए थे. सुनवाई के दौरान दलील दी गई थी कि वह केंद्र सरकार के एक बड़े अधिकारी के करीबी है. लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया है.
कोर्ट का संवेदनशील गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश
याचिककर्ताओ की यह भी मांग थी कि कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुभाष रेड्डी के बजाए पूर्व सीजेआई को करने को कहा गया था. कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह सबसे पहले पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकरियों के खिलाफ लक्षित हिंसा और दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा की जांच करें. कोर्ट ने संवेदनशील गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने अपने पांच सदस्यीय हाई पावर्ड जांच समिति को जुलाई के विरोध-प्रदर्शनों की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है. इस जांच में पैलेट गन के इस्तेमाल, टारगेटेड हिंसा, महिला प्रदर्शनकरियों के उत्पीड़न, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और संपत्तियों के नुकसान की जांच की जाएगी.
संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय खुद सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा
साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए जुलाई के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर फैसला कोर्ट करेगा. कोर्ट ने कहा जरूरत पड़ने पर कमेटी एक अलग से ऑनलाइन पोर्टल भी बना सकती है, जिसके जरिए संवेदनशील गवाह और अन्य संबंधित लोग दस्तावेज और सबूत जमा कर सकें. कोर्ट ने डॉक्टर मोनिका गुसैन और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सी सोलोमन को एचपीइसी की ओर से अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. दोनों पक्षों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका भी निभाएंगे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय खुद सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा.
यह भी पढ़ें-दिल्ली हाई कोर्ट ने अमिताभ झुनझुनवाला की जमानत याचिका पर ED से मांगा जवाब
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


