Delhi High Court: दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस में डूसू चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने साफ कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हिंसा और आपराधिक गतिविधियों का मंच नहीं बनने दिया जा सकता.
डूसू चुनाव में गुंडागर्दी पर हाई कोर्ट सख्त, 18 सितंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने दिल्ली सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब किया है. कोर्ट 18 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम इस तरह के आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं करेंगे. मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर साल चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती है.
कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें पुलिस और प्रशासन
कोर्ट ने अधिकारियों को यह बताने को कहा है कि हिंसा की घटनाओं को रोकने और इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर में चुनावी गतिविधियों के नाम पर हिंसा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने संकेत दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में कानून व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है.
नतीजों पर रोक की तलवार: ABVP का NSUI पर हमले का आरोप
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के जवाबों से खुश नहीं हुआ तो डूसू चुनाव के वोटों की गिनती और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा सकता है. बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया पर हमला करने का आरोप लगाया है. एबीवीपी का दावा है कि एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने उनके सदस्यों पर हमला किया है. 18 सितंबर को वोटों की होने वाली गिनती होगी या नहीं अब यह दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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