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BIMSTEC Conference Goa: पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए एकजुट हुए सातों सदस्य देश, ‘गोवा कन्क्लूजन’ ने तय की भावी दिशा

BIMSTEC TRADITIONAL MEDICINE SUMMIT: गोवा में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) पर आयोजित तीसरे बिम्सटेक सम्मेलन तथा दूसरी नोडल ग्रुप बैठक का सफलतापूर्वक समापन हो गया. सातों बिम्सटेक सदस्य देशों ने पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, मानकीकरण और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति व्यक्त की है.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

पणजी (गोवा) 17 सितंबर 2026: पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) पर आयोजित तीसरे बिम्सटेक (BIMSTEC) सम्मेलन और दूसरी नोडल ग्रुप बैठक का गुरुवार को गोवा में सफलतापूर्वक समापन हो गया. आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय महत्वपूर्ण सम्मेलन में सभी सात बिम्सटेक सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया.

‘गोवा कन्क्लूजन’ और 4 प्रमुख सहयोग क्षेत्रों पर बनी सहमति

नोडल ग्रुप के गहन विचार-विमर्श के बाद सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को गति देने के लिए चार प्रमुख आधार स्तंभों पर सहमति जताई:

संस्थागत एवं नीतिगत सहयोग: सदस्य देशों के बीच विनियामक और नीतिगत स्तर पर तालमेल.

मानक एवं क्षेत्रीय व्यापार: पारंपरिक औषधियों के गुणवत्ता मानक तय करना और सीमा-पार व्यापार को सुगम बनाना.

दस्तावेजीकरण एवं क्षमता निर्माण: पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान व आनुवंशिक संपदा की बायो-पायरेसी रोकने के लिए साझा डिजिटल डेटाबेस और तकनीकी प्रशिक्षण.

कार्यान्वयन तंत्र: तय रणनीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए निगरानी प्रणाली.

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के निदेशक प्रो. वैद्य पी.के. प्रजापति ने कहा कि इस सम्मेलन में केवल चर्चा नहीं हुई, बल्कि ठोस रणनीतियों पर मुहर लगी है. उन्होंने रेखांकित किया कि सम्मेलन से निकला ‘गोवा कन्क्लूजन’ (Goa Conclusion) भविष्य में बिम्सटेक देशों के साझा स्वास्थ्य लक्ष्यों को मजबूत आधार प्रदान करेगा.

AIIA गोवा का दौरा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

सम्मेलन के दूसरे दिन विदेशी प्रतिनिधियों ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), धारगल (गोवा) का दौरा किया. प्रतिनिधियों ने संस्थान की आधुनिक तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाओं और अकादमिक उत्कृष्टता का अवलोकन किया. इस अवसर पर औषधीय पौधों का रोपण भी किया गया, जो पारंपरिक चिकित्सा और जैव विविधता संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बना.

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मोनालिसा दास ने सभी देशों की रचनात्मक भागीदारी की सराहना की. वहीं, बिम्सटेक सचिवालय के निदेशक (विज्ञान, प्रौद्योगिकी व स्वास्थ्य) श्री कदिरकामु कंदासामी योगनादन ने कहा कि इस क्षेत्रीय पहल का मूल उद्देश्य जन-कल्याण, स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करना और समृद्ध पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखना है. अंत में AIIA गोवा की डीन प्रो. डॉ. सुजाता कदम ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया.



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