Indore No Car Day: जय व्यास/इंदौर: मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुधार के इरादे से ‘नो कार डे’ का आयोजन किया गया. शहर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी लग्जरी कारें छोड़कर पर्यावरण-अनुकूल वाहनों से दफ्तर पहुंचकर एक नई मिसाल पेश की. हालांकि, अधिकारियों के इस उत्साह के उलट शहर की सड़कों पर आम नागरिकों की भागीदारी काफी कम देखने को मिली.
साईकिल से कार्यालय पहुंचे कमिश्नर
शहर में ‘नो कार डे’ की इस खास मुहिम के तहत इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह अपने सरकारी आवास से खुद साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचे. रास्ते में उन्होंने आम लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया.
वहीं, इंदौर के कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर ने भी सादगी की मिसाल पेश करते हुए ई-स्कूटर से अपने-अपने दफ्तरों का रुख किया. इसके अलावा प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर भी चार पहिया वाहन छोड़कर मोटरसाइकिल से पहुंचे.
इंदौर में ‘नो कार डे’ का तीसरा संस्करण
गौरतलब है कि इंदौर में ‘नो कार डे’ का यह तीसरा आयोजन था. इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य लोगों को सप्ताह में कम से कम एक दिन कार का इस्तेमाल न करने, छोटी दूरियों के लिए पैदल चलने या साइकिल व ई-वाहन अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने कहा कि ऐसे अभियानों से न केवल प्रदूषण घटता है बल्कि शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलती है. उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है.
अधिकारियों ने निभाया फर्ज
भले ही अफसरों और जन प्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सादगी का संदेश दिया, लेकिन सड़कों पर हर रोज की तरह कारों का तांता लगा रहा. आम जनता पर इस अपील का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया. जानकारों का मानना है कि इस तरह की पहल को वास्तव में सफल बनाने के लिए केवल एक दिन का आयोजन काफी नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों की सोच में बदलाव लाना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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