संबित पात्रा ने विपक्ष को दिया जवाब
दिल्ली में बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के दो कमिश्नरों ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. पात्रा ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और यह लोकतंत्र के खिलाफ है.
लोकतांत्रिक बातचीत को तानाशाही बताना गलत
पात्रा ने कहा कि अगर तीनों चुनाव आयुक्त आपस में बातचीत नहीं करते, तो विपक्ष कहता है कि वे सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं. लेकिन जब विचार-विमर्श होता है और पत्राचार सामने आता है, तो विपक्ष इसे तानाशाही का सबूत बताता है. उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों आयुक्तों के बीच 14 बार आधिकारिक बातचीत हुई है, जो लोकतंत्र की सेहतमंद निशानी है.
वोट चोरी के आरोपों पर जवाब
बीजेपी नेता ने विपक्ष द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बंगाल की 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोट कटे, और इन्हीं सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इसका मतलब साफ है कि आरोप निराधार हैं और विपक्ष जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.
पात्रा का कांग्रेस पर हमला
पात्रा ने कांग्रेस को घोटालों की जननी बताते हुए कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद विपक्षी दल लगातार कमजोर होते गए. जनता ने उन्हें नकार दिया और अब वे चुनावी मैदान में टिक नहीं पा रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है.
चुनाव आयोग की भूमिका
संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने दस्तावेज के पहले ही पैराग्राफ में साफ लिखा है कि सभी लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद SIR कराने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था. तीनों आयुक्त एकमत थे और किसी तरह का मतभेद नहीं था. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की ताकत है, न कि तानाशाही.
‘विपक्ष खुद अपने ही बनाए जाल में फंस गया’
बीजेपी सांसद ने कहा कि आज विपक्ष खुद अपने ही बनाए जाल में फंस गया है. वे बार-बार कहते हैं कि चुनाव आयोग और सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह लोकतांत्रिक ढंग से काम कर रही हैं और देश के लोकतंत्र को मजबूत बना रही हैं.
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पात्रा ने जोर देकर कहा कि भारत का चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाएं किसी भी तानाशाही शासन के अधीन नहीं हैं. वे स्वतंत्र और लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष का आरोप पूरी तरह झूठा है और यह जनता को भ्रमित करने की कोशिश है.
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-भारत एक्सप्रेस
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