IRDAI Insurance Mis-Selling Rules: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप सिर्फ जानकारी लेने गए हों, लेकिन बैंक एजेंट या इंश्योरेंस ब्रोकर ने आपको एक खास पॉलिसी चिपा दी? उस एजेंट का यह उत्साह कंपनी के प्रति निष्ठा नहीं, बल्कि ‘कमिशन का गणित’ होता है. लेकिन बता दें अब देश की बीमा नियामक संस्था IRDAI इस पूरे गणित को ध्वस्त करने जा रही है. IRDAI के नए प्रस्ताव के लागू होते ही भारत में इंश्योरेंस बेचने का पूरा तरीका बदलने वाला है और मिस-सेलिंग का धंधा बंद होने की कगार पर है.
जानिए क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
बीमा कंपनियां अब तक ग्राहकों के प्रीमियम के एक बड़े हिस्से को भारी-भरकम कमिशन, विज्ञापनों और ब्रोकर्स की फौज पर बेहिसाब पानी की तरह बहा रही थीं. IRDAI ने इसे सीधे आधे पर लाने का प्लान तैयार किया है. जीवन बीमा कंपनियों को अगले दो सालों में अपना खर्च घटाकर 15% और 5 सालों में 12.5% पर लाना होगा. वहीं, हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को अपने खर्च का दायरा 30% से घटाकर 20% पर समेटना होगा. इस कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में मिलेगा.
कमीशन की सीमा होगी तय
अब तक जिस पॉलिसी को बेचने में एजेंट को ज्यादा पापड़ नहीं बेलने पड़ते थे, उस पर भी वे मोटा कमिशन वसूलते थे. उदाहरण के लिए, होम लोन के साथ चुपके से बेची जाने वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर बैंक और एजेंट्स को करीब 45% तक का तगड़ा कमिशन मिलता था. IRDAI के नए नियमों के तहत यह कमिशन सीधे 45% से गिरकर महज 2% पर आ जाएगा. अब कमिशन सिर्फ पॉलिसी के फीचर्स और उसे समझाने में लगी मेहनत के हिसाब से ही तय होगा.
पॉलिसी बाजार के शेयरों में 36% की ऐतिहासिक गिरावट
IRDAI के इस ड्राफ्ट पेपर के बाहर आते ही शेयर बाजार में हड़कंप मच गया और दिग्गजों का बड़ा नुकसान हुआ. पॉलिसी बाजार की पैरेंट कंपनी PB Fintech Limited के शेयर एक ही दिन में 36% की भयंकर गिरावट के साथ 24 सितंबर 2026 को ₹1,207.20 के स्तर पर आ गिरे. वहीं, बैंकों के लिए भी चुपचाप कमाई देने वाला यह बड़ा जरिया अब बंद होने जा रहा है. हालांकि, LIC और HDFC Life जैसी दिग्गज कंपनियों पर इसका असर कम पड़ेगा क्योंकि उनके खर्चे पहले से ही तय सीमा के करीब हैं.
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छोटे शहरों में बीमा पहुंच का नया संकट
ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब एजेंट्स उन्हें वही पॉलिसी बेचेंगे जो उनकी जरूरत के हिसाब से सही होगी, न कि वो जिसमें ज्यादा कमिशन बनता हो. लेकिन इस सिक्के का एक दूसरा स्याह पहलू भी है. अगर ₹3,000 की टर्म पॉलिसी बेचने पर एजेंट को कोई खास कमिशन नहीं मिलेगा, तो वह छोटे शहरों और गांवों के ग्राहकों तक जाना ही बंद कर सकता है. इससे भारत में पहले से ही कम इंश्योरेंस पेनिट्रेशन (बीमा पहुंच) की समस्या और गहरा सकती है.
25 अक्टूबर 2026 तक मांगा गया फीडबैक
IRDAI का यह ड्राफ्ट फिलहाल शुरुआती प्रस्ताव है और नियामक ने इस पर सभी स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं. हालांकि, इसमें कुछ मामूली बदलाव हो सकते हैं, लेकिन IRDAI की मंशा बिल्कुल साफ है-भारत में इंश्योरेंस का कारोबार अब कमिशन-ड्रिवेन नहीं, बल्कि कस्टमर-ड्रिवेन होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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