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सरकार देगी सुरक्षा: PHDCCI सेमिनार में नए लेबर कोड पर गहन मंथन, जानिए कंपनियों को क्या करने होंगे बदलाव?

PHDCCI के सेमिनार में श्रम सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने नए लेबर कोड पर अहम जानकारियां साझा कीं. जानिए कैसे 29 पुराने कानून बदलकर 4 नए कोड बनेंगे और एमएसएमई व गिग वर्कर्स को क्या फायदे मिलेंगे?

PHDCCI Labour Code Seminar

देश के श्रम कानूनों में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव अब अपनी अंतिम तैयारियों में है. पुराने नियमों, कागजी खानापूरी और कानूनी उलझनों को खत्म कर केंद्र सरकार जिन चार नए लेबर कोड को जमीन पर उतारने जा रही है, वे सिर्फ उद्योगों के कंप्लायंस को आसान नहीं बनाएंगे, बल्कि देश के करोड़ों असंगठित और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच भी देंगे. नई दिल्ली के पीएचडी हाउस में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित एक सेमिनार में यह बात खुलकर सामने आई.

इस सेमिनार में उद्योग जगत के दिग्गजों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने नए लेबर कोड के व्यावहारिक असर, कंप्लायंस की जरूरतों और नियोक्ताओं के लिए आने वाले बदलावों पर गहराई से मंथन किया. मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार (IAS) ने स्पष्ट किया कि ये नए लेबर कोड केवल कानूनी सुधार नहीं हैं, बल्कि यह सरकार के पुराने ‘नियंत्रण वाले नजरिए’ को बदलकर सरकार, उद्योग और कामगारों के बीच ‘मजबूत साझेदारी और सहयोग’ का एक नया दौर शुरू कर रहे हैं.

नियंत्रण से सहयोग की ओर ऐतिहासिक बदलाव

केंद्रीय श्रम सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने अपने संबोधन में सुधारों के हर पहलू को विस्तार से सामने रखा. उन्होंने साफ किया कि 29 पुराने केंद्रीय कानूनों को समेटकर बनाए गए ये 4 कोड देश के 316 औद्योगिक जिलों में लागू करने की ठोस तैयारी चल रही है, जहां राज्यों के साथ मिलकर मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं. 29 कानूनों को चार संहिताओं में समेटना, कानूनी धाराओं को कम करना, रिटर्न फाइलिंग की एक जैसी व्यवस्था और मजदूरी (Wages) की एक समान परिभाषा तय करना ऐतिहासिक कदम हैं. उन्होंने साफ किया कि डिजिटल कंप्लायंस और ई-पोर्टल्स के जरिए कागजी उलझनें पूरी तरह खत्म होंगी.

श्रम सचिव ने बताया कि इसे लागू करना एक पीढ़ीगत सुधार (Once-in-a-generation reform) है, जो सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. मंत्रालय देश के 316 प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर वाले जिलों में जागरूकता और ट्रेनिंग अभियान चला रहा है. ज्यादातर राज्यों ने अपने नियमों का ड्राफ्ट पहले ही प्रकाशित कर दिया है और राज्य स्तर पर नियमों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ फ्लोर वेज पर और ज्यादा स्पष्टता लाने का काम तेजी से चल रहा है.

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सुरक्षा

डॉ. कुमार ने रेखांकित किया कि नया ढांचा पहली बार गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने का कानूनी आधार दे रहा है. नेशनल करियर सर्विस और डिजिटल डेटाबेस के जरिए रोजगार और स्किलिंग को सीधे जोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर के विकासशील देश (Global South) भारत के इस आधुनिक श्रम सुधार मॉडल को उत्सुकता से देख रहे हैं. भारत अब एक आधुनिक लेबर इकोसिस्टम का वैश्विक मानक बनने की दिशा में है.

उद्योगपतियों और विशेषज्ञों के प्रमुख विचार

सेमिनार में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और सरकार के सामने कुछ व्यावहारिक सुझाव भी पेश किए. आइये जानें दिग्गजों ने क्या कहा?

राजीव तलवार, आईएएस (सेवानिवृत्त), पूर्व अध्यक्ष, PHDCCI

चारों लेबर कोड सिर्फ नियमों तक सीमित न रहें, बल्कि कामगारों के सम्मान, सुरक्षा और फॉर्मलाइजेशन का जरिया बनें. शहरों की ओर बढ़ते पलायन को देखते हुए प्रवासी मजदूरों के लिए सस्ते मकान (Affordable Housing) और बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि सुधारों से उद्योगों की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन ऊंची उत्पादकता (Productivity) और स्किलिंग के दम पर ही भारत मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया से मुकाबला कर पाएगा.

आशीष विग, चेयरमैन, एचआर एवं आईटी कमेटी, PHDCCI

उद्योगों की व्यावहारिक दिक्कतों को सामने रखते हुए उन्होंने सरकार से अपील की कि नए कंप्लायंस नियमों को अपनाने के लिए इंडस्ट्री को कम से कम एक साल का ट्रांजिशन और सपोर्ट पीरियड दिया जाना चाहिए. शुरुआती दौर में किसी भी भ्रम या कामकाज में रुकावट से बचने के लिए उन्होंने एक ‘डेडिकेटेड हेल्प डेस्क’ बनाने का सुझाव दिया.

विनीत नहाटा, चेयरमैन, इकोनॉमिक अफेयर्स कमेटी, PHDCCI

उन्होंने कहा कि नए कोड में कई पुरानी कानूनी धाराओं को गैर-अपराधिक (Decriminalise) किया गया है, जिससे उद्योगों में बैठा कानूनी डर खत्म होगा. गिग वर्कर्स को सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे बेहतर औद्योगिक शांति बनेगी.

अखिल चांदना, पार्टनर एवं लीडर, ग्रांट थॉर्नटन भारत

उन्होंने 500 से अधिक कंपनियों के अनुभव और 5,000 से ज्यादा लोगों के सर्वे पर आधारित प्रेजेंटेशन पेश की. उन्होंने बताया कि उद्योग जगत वर्कफोर्स असेसमेंट, वेज पॉलिसी और सोशल सिक्योरिटी ऑडिट के जरिए नए कोड को अपनाने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने राज्यवार नियमों, ओवरटाइम और वर्कर क्लासिफिकेशन पर निरंतर स्पष्टता की जरूरत बताई.

डॉ. रंजीत मेहता, सीईओ एवं सेक्रेटरी जनरल, PHDCCI

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है तो हमारे वर्कप्लेस को भविष्य के लिए तैयार होना होगा. उन्होंने विशेष रूप से कहा कि नियम इतने सरल होने चाहिए कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई (MSME) सेक्टर को वकीलों या कानूनी सलाहकारों पर निर्भर न रहना पड़े. उन्होंने ब्लॉक और इंडस्ट्रियल एरिया स्तर पर एचआर, फैक्ट्री मैनेजर्स और ठेकेदारों के लिए व्यावहारिक चेकलिस्ट और ट्रेनिंग की मांग की.

डॉ. जतिंदर सिंह, डिप्टी सेक्रेटरी जनरल, PHDCCI

उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच निरंतर संवाद से ही यह सुनिश्चित होगा कि सुधारों का असली फायदा मजदूरों और नियोक्ताओं दोनों तक पहुंचे.

तकनीकी सत्र और मुख्य चर्चा के विषय

कार्यक्रम में दो प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. इसमें पहला व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2020 (OSH Code) एवं मजदूरी संहिता, 2019 (Code on Wages) रहा. जबकि, दूसरा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code) एवं औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code) पर केंद्रित रहा. इन सत्रों में विशेषज्ञों ने कंपनियों के एचआर, लीगल हेड्स और फैक्ट्री मालिकों को यह समझाया कि नए नियमों के तहत वेज स्ट्रक्चर, पीएफ, ग्रेच्युटी और वर्किंग कंडीशंस में क्या-क्या बदलाव करने होंगे.

PHDCCI का यह सेमिनार इस स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ कि लेबर कोड का यह सफर सिर्फ कानून बदलने का नहीं, बल्कि भारत के वर्क कल्चर को बदलने का आंदोलन है. सरकार की डिजिटल तैयारी और उद्योगों की सकारात्मक सोच यह दर्शाती है कि अगर एक साल का हैंडहोल्डिंग सपोर्ट और जमीनी स्पष्टता मिल जाए, तो यह सुधार देश में लाखों नए रोजगार पैदा करने के साथ-साथ हर कामगार को गरिमा और सामाजिक सुरक्षा देने में मील का पत्थर साबित होगा.



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