Vidyasagar Jayanti Tribute: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभ और महान समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. गृह मंत्री ने द्विभाषी (हिंदी और बांग्ला) संदेश जारी कर शिक्षा, नारी उत्थान और ‘वर्ण परिचय’ के जरिए बांग्ला लिपि को नया जीवन देने में उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन किया.
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी की जयंती पर दिया गया यह श्रद्धांजलि संदेश बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रति गहरा सम्मान दर्शाता है. विद्यासागर जी द्वारा शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में बोए गए बीज आज भी आधुनिक भारतीय समाज की प्रगति का आधार बने हुए हैं.
गृहमंत्रालय का संदेश: ‘बंगाल पुनर्जागरण के महास्तंभ को नमन’
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया संदेश में ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी को याद करते हुए लिखा कि वे बंगाल पुनर्जागरण के ऐसे मजबूत स्तंभ थे, जिन्होंने समाज को नई दिशा दी. अमित शाह ने कहा कि विद्यासागर जी का पूरा जीवन और उनके उच्च आदर्श आज भी पूरे देश को प्रकाश और प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं.
बंगाल पुनर्जागरण के महान स्तंभ, ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूँ।
विद्यासागर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बनाया। ‘वर्णपरिचय’ की रचना कर उन्होंने बांग्ला वर्णमाला को नया स्वरूप देने के साथ-साथ असंख्य बच्चों के लिए… pic.twitter.com/X6ZkYzxPvw
— Amit Shah (@AmitShah) September 26, 2026
‘वर्ण परिचय’ से जलाई शिक्षा की नई अलख
अमित शाह ने विद्यासागर जी के शैक्षणिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा और शक्तिशाली माध्यम बनाया. उन्होंने ‘वर्ण परिचय’ (Barnaparichay) की रचना कर न केवल बांग्ला वर्णमाला को सरल और सुलभ स्वरूप प्रदान किया, बल्कि समाज के हर वर्ग और बच्चों के लिए ज्ञान के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए.
नारी शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के लिए आजीवन संघर्ष
अपने श्रद्धांजलि संदेश में गृह मंत्री ने विद्यासागर जी के सामाजिक सुधारों का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि विधवा पुनर्विवाह को कानूनी और सामाजिक मान्यता दिलाने तथा नारी शिक्षा के विस्तार के लिए विद्यासागर जी का आजीवन संघर्ष ऐतिहासिक रहा है. उनका यह योगदान भारतीय सामाजिक सुधार के इतिहास में सदैव अमर रहेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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