Meghankar Tirtha Pitru Paksha Shradh: हिंदू धर्म में पितृपक्ष के 15 दिनों को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे पावन काल माना जाता है. देश में गया और पुष्कर जैसे प्रमुख तीर्थों की तरह ही महाराष्ट्र के खामगांव के समीप स्थित ऐतिहासिक ‘मेघंकर तीर्थ’ को भी पितृ कर्म के लिए अत्यंत फलदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला धाम माना गया है. मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थल पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है और कुल को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
भगवान जनार्दन का साक्षात स्वरूप है यह धाम
मेघंकर तीर्थ को पौराणिक मान्यताओं में भगवान विष्णु (जनार्दन) का साक्षात स्वरूप माना गया है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्माजी ने पावन यज्ञ का आयोजन किया था, तब यज्ञ के एक विशेष पात्र से इस पवित्र नदी का उद्भव हुआ था. इसी दिव्य उत्पत्ति के कारण इस स्थान को त्रिताप हरने वाला और पापमुक्ति का महातीर्थ कहा जाता है.
पैनगंगा के तट पर स्थित, पुराणों में भी महिमा
यह पावन तीर्थ पैनगंगा नदी के तट पर स्थित है. ब्रह्मपुराण और पद्मपुराण में भी श्राद्ध कर्म के संदर्भ में मेघंकर का विशेष उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण न केवल दिवंगत आत्माओं को सद्गति दिलाता है, बल्कि श्राद्धकर्ता के जाने-अनजाने हुए पापों का भी क्षय करता है. यही कारण है कि पितृपक्ष के दौरान यहां देश के विभिन्न अंचलों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के उद्धार की कामना के साथ पहुंचते हैं.
तर्पण से तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं पूर्वज
हिंदू मान्यताओं में देहावसान के बाद आत्मा की अंतिम शांति और कर्म चक्र से मुक्ति के लिए पिंडदान को अनिवार्य माना गया है. मेघंकर में श्रद्धालु पवित्र जल में स्नान कर विधिवत तिलांजलि और पिंडदान करते हैं. मान्यता है कि पितृपक्ष में जब वंशज इस तीर्थ पर पितरों को जलांजलि अर्पित करते हैं, तो पूर्वज तृप्त होकर अपने परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देते हैं.
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