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दिल्ली में शिकागो ओपन यूनिवर्सिटी का 7वां दीक्षांत समारोह, पद्मश्री उमाशंकर पांडेय और पवन त्रिपाठी को मिला सम्मान

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में शिकागो ओपन यूनिवर्सिटी का सातवां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ. इसमें पद्मश्री उमाशंकर पांडेय और पवन त्रिपाठी समेत 55 हस्तियों को मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया.

Chicago Open University 7th Convocation Delhi Honorary Doctorate Awardees

Chicago Open University 7th Convocation: राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित ली मेरिडियन होटल में ‘शिकागो ओपन यूनिवर्सिटी’ के सातवें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया. इस खास मौके पर देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचीं 50 से 55 ऐसी प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जल संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. कार्यक्रम में मुख्य रूप से मानद डॉक्टरेट, लाइफटाइम अचीवमेंट और एक्सीलेंस अवॉर्ड प्रदान किए गए.

सम्मान के साथ बढ़ जाती है जिम्मेदारी

सम्मान पाने वालों में महाराष्ट्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सिद्धिविनायक मंदिर के कोषाध्यक्ष पवन त्रिपाठी, प्रदीप त्रिपाठी तथा पद्मश्री उमाशंकर पांडेय जैसी जानी-मानी शख्सियतें शामिल रहीं. अवॉर्ड मिलने के बाद पवन त्रिपाठी ने कहा कि हर सम्मान के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी बढ़ जाती है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया.

वहीं जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी काम करने वाले पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने ‘खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़’ का मूलमंत्र साझा किया. उन्होंने यमुना नदी के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की अपील की.

इसके अलावा, कोरोना काल में गरीब परिवारों की मदद और रक्तदान जैसे कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद कुमार सिंह और साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधियों को भी मंच पर सराहा गया.

प्रोफाइल जांच और शोध पत्र के आधार पर हुआ चयन

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आर.के. गुप्ता और इंडिया ऑफिस की डायरेक्टर भावना गुप्ता ने चयन प्रक्रिया की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अवॉर्ड के लिए चुने गए लोगों के सामाजिक योगदान का गहराई से आकलन किया जाता है. दस्तावेजों की जांच के बाद चयनित व्यक्तियों को अपने क्षेत्र से जुड़ा शोध पत्र (लेख) लिखना होता है और अपने विचार भी रखने होते हैं.

पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी समेत कई गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने इस समारोह को और भी गरिमामयी बना दिया. यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराने का मंच बना.

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-भारत एक्सप्रेस



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