19 वर्षीय कार्तिक सहनी तमसा नदी की सफाई करते हुए
Kartik Sahni Mau: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि समाज में बदलाव लाने के लिए किसी बड़ी टीम की नहीं, बल्कि सिर्फ एक मजबूत इरादे की जरूरत होती है. यहां रहने वाले 19 वर्षीय कार्तिक सहनी ने अकेले दम पर कचरे से पूरी तरह पट चुकी तमसा नदी का कायाकल्प कर दिया है. कार्तिक ने महज 22 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद नदी से 10 क्विंटल से ज्यादा प्लास्टिक और अन्य कूड़ा-कचरा बाहर निकाला है.
खेतों की घटती सिंचाई देख लिया बड़ा फैसला(Kartik Sahni Mau)
कार्तिक एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और उनके परिवार के खेत पूरी तरह से इसी तमसा नदी पर निर्भर हैं. पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों और फैक्ट्रियों द्वारा फेंके गए कचरे के कारण यह नदी एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी थी. बदबू इतनी भयानक थी कि लोग नदी के पास से गुजरना भी छोड़ चुके थे. पानी इतना दूषित हो गया था कि फसलों को भी नुकसान हो रहा था. जब प्रशासन और समाज ने इस ओर से आंखें मूंद लीं, तब कार्तिक ने खुद नदी में उतरने का फैसला किया.
सांपों का डर और भयंकर बदबू भी नहीं डिगा पाई हौसला
कार्तिक के लिए यह सफर आसान नहीं था. मध्य प्रदेश के पर्यावरण एक्टिविस्ट बिट्टू तबाही (जिन्होंने अजनार नदी साफ की थी) के वीडियो देखकर कार्तिक को प्रेरणा मिली. कार्तिक ने बिना किसी सरकारी फंड या आधुनिक मशीनरी के रोज 3 से 4 घंटे नदी के गंदे पानी में बिताना शुरू किया.
इस दौरान उन्हें (Kartik Sahni Mau) भयंकर बदबू, त्वचा में संक्रमण (Infection) के खतरे और जहरीले सांपों का सामना भी करना पड़ा. शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी, लेकिन कार्तिक अपने इरादे पर डटे रहे. धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरिए कुछ स्थानीय युवा भी उनके इस अभियान से जुड़ने लगे.
सिर्फ सफाई नहीं, दोबारा गंदगी रोकने का भी इंतजाम
22 दिनों की अथक मेहनत के बाद जब नदी का पानी साफ दिखने लगा, तो कार्तिक वहीं नहीं रुके. उन्होंने नदी के किनारों पर डस्टबिन (कूड़ेदान) रखवाए हैं और वे खुद रोज वहां की निगरानी करते हैं ताकि लोग दोबारा नदी में कचरा न फेंकें.
तालाबों को पुनर्जीवित करना है अगला लक्ष्य
तमसा नदी को एक नई जिंदगी देने के बाद कार्तिक सहनी का अगला मिशन अपने इलाके के पुराने और सूख रहे तालाबों को साफ करना है. उनका मानना है कि अगर देश का हर युवा अपने आसपास के सिर्फ एक जलस्रोत को बचाने की जिम्मेदारी उठा ले, तो भारत को जल संकट और प्रदूषण से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है. कार्तिक की यह कहानी आज करोड़ों लोगों के लिए एक सीख है कि बदलाव की शुरुआत हमेशा खुद से ही होती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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