पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के चार बैंक खातों को सील किए जाने के मामले में अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है.
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस बी. वराले की पीठ ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें पार्टी को इन खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी गई थी.
‘Article 136 के तहत हस्तक्षेप का आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस चरण में मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई विचार नहीं करना चाहता और न ही संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेष क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने का इच्छुक है. पीठ ने कोलकाता हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में तेजी लाए और जल्द निर्णय ले.
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मुख्य विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक खातों में जमा बड़ी राशि के वास्तविक हकदार का फैसला होना बाकी है. कोर्ट के अनुसार, पहले यह कानूनी रूप से तय होना आवश्यक है कि पार्टी का असली गुट कौन सा है.
804 करोड़ रुपए से जुड़े 4 खातों का विवाद
यह पूरा मामला बैंक ऑफ इंडिया की हरीश मुखर्जी रोड शाखा में स्थित एआईटीसी (AITC) के चार खातों से जुड़ा हुआ है, जिनमें लगभग 804 करोड़ रुपए जमा हैं. पश्चिम बंगाल पुलिस ने विधायक विश्वनाथ दास की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद इन खातों को फ्रीज कर दिया था.
इससे पूर्व, कोलकाता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट को इन खातों को ऑपरेट करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट का मानना था कि ऐसी छूट देने से उसका पिछला आदेश कमजोर पड़ जाएगा.
रोजमर्रा के खर्च के लिए कोर्ट की निगरानी में सीमित छूट
गौरतलब है कि इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने टीएमसी को रोजमर्रा के संगठनात्मक खर्चों को पूरा करने के लिए तीन अन्य खातों के इस्तेमाल की सशर्त अनुमति दी थी. अदालत ने शर्त रखी थी कि खातों का संचालन उसके द्वारा नियुक्त अधिकारी की कड़ी निगरानी में होगा.
यह अंतरिम व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक के लिए लागू की गई थी. हाईकोर्ट ने तब पुलिस द्वारा जल्दबाजी में खाते सील करने पर सवाल उठाए थे और कहा था कि इस अंतरिम राहत का असर निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित मुख्य विवाद पर नहीं पड़ेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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