Bharat Express DD Free Dish

कैंसर पीड़ित 2 माह के बच्चे के खून के लिए वसूले ₹9000: हाईकोर्ट ने अस्पताल को आयुष्मान से हटाने का फैसला रखा बरकरार

Allahabad High Court Ayushman Bharat hospital cancellation: ब्लड कैंसर पीड़ित 2 माह के बच्चे के खून के लिए ₹9 हजार वसूलने वाले अस्पताल को राहत नहीं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष्मान योजना से हटाने का फैसला बरकरार रखा.

UP DGP Rajiv Krishna Appears In Allahabad High Court Over Police Delay Bharat Express

Allahabad High Court

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रयागराज: ब्लड कैंसर से पीड़ित दो माह के बच्चे को चढ़ाए जाने वाले खून की दो यूनिट के लिए 9 हजार रुपये वसूलने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल को राहत देने से इनकार किया.

अदालत ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा. योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित उपचार और सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं.

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने अस्पताल की ओर से दाखिल याचिका खारिज की.

अस्पताल ने राज्य स्वास्थ्य एजेंसी साचिस के तहत अपने पंजीकरण को समाप्त करने संबंधी राज्य पैनल समिति के 19 अगस्त 2026 के आदेश को चुनौती दी थी.

मामले के अनुसार सुरगिमेद अस्पताल को 18 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इसके बाद राज्य पैनल समिति ने 19 अगस्त को अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने का आदेश पारित किया.

आदेश में कहा गया था कि बच्चे को खून चढ़ाने की प्रक्रिया का विवरण इलाज कर रहे डॉक्टर ने बेड हेड टिकट में दर्ज नहीं किया.

अदालत के समक्ष यह बात भी सामने आई कि गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीज के उपचार के दौरान इस तरह का विवरण दर्ज करना अनिवार्य था. आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने को अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाया गया.

हाईकोर्ट ने राज्य पैनल समिति के आदेश की समीक्षा करते हुए कहा कि आदेश में कारणों का विस्तार से उल्लेख भले ही नहीं किया गया हो, लेकिन इससे अभिलेखों में सामने आए तथ्यों का महत्व कम नहीं हो जाता.

पीठ ने यह भी ध्यान दिया कि अस्पताल की ओर से राज्य पैनल समिति के सामने पेश हुए डॉक्टर ने प्रक्रियागत चूक स्वीकार की थी.

मामले के प्रथम दृष्टया तथ्यों पर विचार करते हुए अदालत ने अस्पताल और उसके प्रबंधन की कथित कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. पीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से योजना को लागू करने और उसके तहत इलाज के दौरान जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करने में अस्पताल की ओर से गंभीर कमियां सामने आई हैं.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि साचिस या आयुष्मान भारत योजना के पैनल से हटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अस्पताल या उसके डॉक्टर अपना पेशा जारी नहीं रख सकते. वे अस्पताल आने वाले अन्य मरीजों का उपचार कर सकते हैं.

अदालत ने समझाया कि यह स्थिति ऐसी है जैसे कोई मरीज किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ पर भरोसा नहीं रहने के कारण उसकी सेवाएं लेना बंद कर दे.

पीठ ने कहा,

“योजना के तहत पंजीकरण कोई न्यायिक रूप से लागू कराया जा सकने वाला अधिकार नहीं, बल्कि चुनिंदा अस्पतालों को दिया जाने वाला एक विशेषाधिकार है. हालांकि, राज्य को यह सुविधा बिना किसी भेदभाव के प्रदान करनी चाहिए.”

अदालत ने दोहराया कि अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया भेदभाव रहित होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा मामले में उपलब्ध सामग्री योजना के क्रियान्वयन और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में गंभीर कमियों की ओर संकेत करती है.

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने राज्य पैनल समिति के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और अस्पताल की याचिका खारिज की. इससे आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने का फैसला बरकरार रहा.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read