रूस से डीजल खरीदेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (इमेज-ANI)
US Russia Oil Deal: रूस से तेल खरीदने पर दूसरे देशों को प्रतिबंधों की धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्रंप खुद ही पुतिन के सामने सरेंडर कर गए. अब वो रूस से डीजल खरीदने की तैयारी में हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि व्लादिमीर पुतिन ने रूसी डीजल की बड़ी खेप वैश्विक बाजार में भेजने पर सहमति दी है. मकसद है ईंधन की सप्लाई बढ़ाना और कीमतों को नीचे लाना.
लेकिन इस कहानी में एक बड़ा सवाल है. जो अमेरिका रूस के तेल कारोबार पर रोक लगाने की कोशिश करता रहा, वही अब अपनी जरूरत के लिए रूसी सप्लाई का सहारा क्यों ले रहा है? ट्रंप के लिए यह फैसला राहत की खबर हो सकता ही, लेकिन उनकी रूस नीति पर सवाल भी खड़े कर रहा है.
पुतिन ने ट्रंप को क्या दिया?
ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि पुतिन तुरंत तीन लाख टन से ज्यादा डीजल वैश्विक बाजार में भेजने पर सहमत हुए हैं. उनके मुताबिक, नवंबर में पांच लाख टन और डीजल भेजने की बात है. इसके बाद दस लाख टन तेल की सप्लाई भी हो सकती है. आगे की सप्लाई रूस की रिफाइनरियों की स्थिति पर निर्भर करेगी.
#WATCH | US President Donald Trump says, “I think you heard about the oil deal with Russia. That is a big deal. That is massive amounts of oil coming into our country. I want to thank President Putin. We have massive amounts of oil coming into our country, and it is diesel, which is what we want.”
(Source: US Network Pool via Reuters)
— ANI (@ANI) October 9, 2026
क्रेमलिन ने भी कहा कि पुतिन अमेरिका और वैश्विक बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई करने के लिए तैयार हैं. पुतिन ने उम्मीद जताई कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.
महंगे ईंधन ने बढ़ाई ट्रंप की चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है. इसका असर अमेरिका में भी दिखाई दे रहा है. डीजल महंगा होने का मतलब सिर्फ ट्रक और ट्रैक्टर चलाने वालों की जेब पर बोझ बढ़ना नहीं है. इससे माल ढुलाई महंगी होती है. खेती की लागत बढ़ती है. खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा के सामान तक की कीमतों पर असर पड़ सकता है.
ऐसे में रूसी डीजल की सप्लाई बढ़ने से ट्रंप को राहत मिलने की उम्मीद है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव भी होने वाले हैं. ईंधन की कीमतों में कमी ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक फायदा बन सकती है.
ट्रंप इस फैसले को अपनी बातचीत की सफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं. उनका तर्क हो सकता है कि बातचीत से ईंधन की सप्लाई बढ़ रही है और अमेरिकी परिवारों का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है.
रूस से तेल खरीदने वालों को धमकाते रहे हैं ट्रंप
यहीं से ट्रंप की नीति पर सवाल उठते हैं. अमेरिका पहले रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाता रहा है. भारत और चीन जैसे देशों को भी रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी टैरिफ की धमकियों का सामना करना पड़ा है. लेकिन अब जब अमेरिका को खुद ईंधन की जरूरत है, तो रूसी सप्लाई उसके लिए विकल्प बन रही है.
पश्चिमी देशों की रूस के तेल पर पाबंदियों के पीछे यह तर्क रहा है कि तेल और गैस से होने वाली कमाई रूस को युद्ध जारी रखने में मदद देती है. ऐसे में अमेरिकी जरूरत के लिए रूसी डीजल की सप्लाई बढ़ने की संभावना उसकी नीति में विरोधाभास के सवाल खड़े करती है.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुतिन के लिए अहम बात यह हो सकती है कि ट्रंप को लगे कि उन्हें चुनाव से पहले फायदा मिल रहा है और इसका असर बाजार पर पड़ सकता है.
अमेरिका के प्रतिबंधों की विश्वसनीयता पर सवाल
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रतिबंध नीति से जुड़े रहे रिचर्ड नेफ्यू ने भी इस ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए प्रतिबंधों में ढील को सही ठहराता है, तो दूसरे देशों को ऐसा करने से रोकने के लिए उसके पास क्या तर्क बचेगा?
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ट्रंप के सामने अब दो तरह की चुनौती है. एक तरफ उनपर अमेरिका में ईंधन की कीमतें कम करने का दबाव है. दूसरी तरफ रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी नीति की विश्वसनीयता भी बनाए रखनी है.
-भारत एक्सप्रेस
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