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कुपोषण के खिलाफ अदाणी फाउंडेशन का बड़ा अभियान…! सोनभद्र में ICDS की जुगलबंदी से की गई 52 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग

सोनभद्र में ICDS और अदाणी फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट सुपोषण’ के तहत राष्ट्रीय पोषण माह में 14,039 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 1.35 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया.

Sonbhadra

Sonbhadra Project Suposhan: कुपोषण के खात्मे और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को नई मजबूती देने के इरादे से यूपी के सोनभद्र जिले में एक अभूतपूर्व क्रांति देखने को मिली है. बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (ICDS) और अदाणी फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट सुपोषण’ की जुगलबंदी में 9वां ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ जमीनी स्तर पर बेहद आक्रामक और व्यापक अंदाज में संपन्न हुआ.

जिले के हर आंगनवाड़ी केंद्र और गांव-मोहल्ले में जन-जागरूकता का ऐसा चक्रव्यूह रचा गया कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों से लेकर आम परिवारों तक बेहतर स्वास्थ्य और खान-पान का सीधा संदेश पहुंच गया.

14,039 गतिविधियों से 1.35 लाख लोगों तक पहुंच(Sonbhadra Project Suposhan)

राष्ट्रीय पोषण माह की अंतिम रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि यह अभियान केवल कागजी खानापूरी नहीं था. जिलेभर में रिकॉर्ड तोड़ 14,039 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 1,35,874 लोगों की सीधी भागीदारी दर्ज हुई.

6,959 फैमिली काउंसलिंग सेशंस: सीधे परिवारों के घर-घर पहुंचकर बच्चों की सही देखभाल का पाठ पढ़ाया गया.

3,382 फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD): माताओं और अभिभावकों को संतुलित आहार से कुपोषण को मात देने का मंत्र मिला.

रसोई से लेकर बागवानी तक क्रांति

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाने-पीने की चीजों से पौष्टिक आहार बनाने का गुर सिखाने के लिए 1,288 कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए. इतना ही नहीं, ताजी और हरी सब्जियों के लिए घरों में 900 पोषण वाटिकाओं (Nutrition Gardens) का निर्माण कराया गया.

इसके अलावा 358 सुपोषण हेल्प डेस्क, 354 विशाल जागरूकता रैलियां, 335 पोषण मेले और 97 स्वच्छता अभियानों के जरिए समाज के हर तबके को कुपोषण विरोधी जंग से जोड़ा गया.

52,414 बच्चों की विशाल स्क्रीनिंग

अभियान के दौरान 0 से 5 वर्ष तक के 52,414 बच्चों का हेल्थ और न्यूट्रिशन असेसमेंट (स्क्रीनिंग) किया गया ताकि कमजोर बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें तुरंत इलाज और पूरक आहार से जोड़ा जा सके. माताओं को साफ शब्दों में समझाया गया कि बच्चे के जन्म के पहले 6 महीने तक सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही जीवनरक्षक है. 6 महीने पूरे होते ही ऊपरी पौष्टिक आहार और स्तनपान का सही संतुलन ही बच्चे को कुपोषण के दलदल से बचा सकता है.

DPO विनीत सिंह ने थपथपाई पीठ

बाल विकास परियोजना अधिकारियों ने जब इस राष्ट्रीय अभियान के नतीजों की समीक्षा की, तो जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) विनीत सिंह ने अदाणी फाउंडेशन की ‘सुपोषण टीम’ और महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि ICDS और अदाणी फाउंडेशन का यह साझा मॉडल जिले से कुपोषण के खात्मे, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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