Pakistan News: पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर देश के चारों बड़े प्रांतों को तोड़कर 12 से 15 छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने का प्लान बना रहे हैं, जिसे लेकर पूरे देश में भारी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है.
‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बेहतर गवर्नेंस के नाम पर पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान का पुनर्गठन करना चाहते हैं. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रभाव को समाप्त करना और देश की सत्ता पर सेना का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है. संवैधानिक अड़चनों और जनता के आक्रोश के बीच यदि इसे जबरन लागू किया गया, तो यह पाकिस्तान में एक नया गृहयुद्ध या बड़ा सामाजिक संकट खड़ा कर सकता है.
पाकिस्तान का नक्शा बदलने की तैयारी में आसिम मुनीर
अगर इस फैसले को जबरन लागू किया गया, तो यह पहले से ही आंतरिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक और बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बवंडर साबित हो सकता है. सालों पहले, अंग्रेजों ने ‘बांटो और राज करो’ की चाल चलकर भारत को दो हिस्सों में विभाजित किया था. अब कुछ वैसी ही सियासी सुगबुगाहट इस्लामाबाद के गलियारों में भी सुनाई दे रही है, और यह कदम खुद देश के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उठाते दिख रहे हैं.
‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट और मुनीर की योजना
‘द इकोनॉमिस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर बेहतर प्रशासन (गवर्नेंस) का हवाला देते हुए पाकिस्तान के चार बड़े प्रांतों पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान को तोड़कर छोटे हिस्सों में बांटना चाहते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना प्रमुख देश के मौजूदा चार प्रांतों को लगभग 12 से 15 छोटे प्रांतों या करीब 160 जिलों में विभाजित करना चाहते हैं. यदि कागजी तर्कों को देखें, तो यह बात सही लगती है कि पाकिस्तान के मौजूदा प्रांत क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से बहुत बड़े हैं, जिन्हें संभालना केंद्रीय सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.
प्रशासनिक सुधार या सत्ता पर मजबूत पकड़ की साजिश?
भले ही इसे बेहतर गवर्नेंस का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाने की गहरी साजिश है. पाकिस्तान के ये चारों प्रांत पारंपरिक राजनीतिक दलों के मजबूत गढ़ रहे हैं. पंजाब में ‘पीएमएल-एन’ (PML-N) और सिंध में ‘पीपीपी’ (PPP) का लंबे समय से दबदबा रहा है. इन प्रांतों को छोटे टुकड़ों में बांटने से इन पार्टियों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं. इन्हें विभाजित करके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर देश की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ढालना चाहते हैं.
इस कदम के सामने बड़ी चुनौतियां और कानूनी अड़चनें
यह राह इतनी आसान नहीं है. इस योजना के रास्ते में कई बड़े और गंभीर अवरोध खड़े हैं. खैबर पख्तूनख्वा पहले से ही राजनीतिक उथल-पुथल और इमरान खान के समर्थकों के भारी विरोध का सामना कर रहा है. सिंध की सीमाओं में बदलाव का मतलब जातीय पहचान और देश के मुख्य आर्थिक केंद्र (कराची) पर नियंत्रण को लेकर नया संघर्ष खड़ा होना है. पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 239(4) के तहत किसी भी प्रांत की सीमा में बदलाव के लिए संबंधित प्रांतीय विधानसभा का दो-तिहाई बहुमत और संसद के दोनों सदनों की मंजूरी अनिवार्य है, जो मौजूदा माहौल में नामुमकिन जैसा है.
आम जनता की राय और भावी खतरा
इस मुद्दे पर पाकिस्तानी जनता बंटी हुई है. कराची के कुछ नागरिकों का मानना है कि छोटे प्रांतों से प्रशासन चलाना आसान होगा और जवाबदेही बढ़ेगी. वहीं, एक बड़ा वर्ग इसके सख्त विरोध में है. पाकिस्तान के प्रांतों को बांटने का यह प्रस्ताव केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह बदलने का एक हाई-स्टेक दांव है. अगर इसे जबरन लागू किया गया, तो यह पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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